बुधवार, 03 जनवरी, 2007 को 18:07 GMT तक के समाचार
फ़ैसल मोहम्मद अली
बीबीसी संवाददाता, भोपाल
छत्तीसगढ़ राज्य में 79 माओवादियों ने राज्य पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. समर्पण करने वालों में 20 गुरिल्ला लड़ाके भी शामिल हैं.
राजधानी रायपुर में पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण करने वालों में 12 महिलाएँ भी हैं.
कुछ माओवादियों ने अपने हथियार भी पुलिस को सौंपे जिनमें देसी पिस्तौलें, राइफ़लें और पुलिस के स्टेनगन से मिलती-जुलती बंदूकें हैं.
सभी माओवादियों ने महात्मा गाँधी की तस्वीर पर माला पहनाकर हिंसा छोड़ने और गाँधी के अहिंसा के मार्ग पर चलने की शपथ ली.
इस पूर्व नियोजित आत्मसमर्पण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रमन सिंह, गृह मंत्री रामविचार नेताम और पुलिस के आला अधिकारी मौजूद थे.
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी रुपदेव गवड़े ने कहा कि वे आर्थिक तंगी और गुरिल्ला लड़ाके के रुप में यहाँ वहाँ भटक-भटककर परेशान हो गए थे और अब समाज की मुख्यधारा से जुड़ना चाहते हैं.
पुलिस का कहना है कि जिन माओवादियों ने बुधवार को आत्मसमर्पण किया वे केशकाल इलाक़े के रहने वाले हैं.
उल्लेखनीय है कि इस समय छत्तीसगढ़ नक्सली हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से है और राज्य के दक्षिणी हिस्से बस्तर में पिछले एक साल में सौ से अधिक ग्रामीण नक्सली हिंसा में मारे गए हैं.
आत्मसमर्पण नीति
गृह मंत्री रामविचार नेताम का कहना है कि नक्सलियों का यह आत्मसमर्पण राज्य सरकार की नई आत्मसमर्पण नीति के कारण हुआ है.
राज्य सरकार ने हाल ही में एक आत्मसमर्पण नीति घोषित की है जिसके तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को आर्थिक सहायता और सुरक्षा उपलब्ध करवाई जाएगी और यदि किसी माओवादी का आपराधिक रिकॉर्ड न हुआ तो नौकरी भी दिलवाई जाएगी.
हालांकि एक सवाल के जवाब में गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि आपराधिक रिकॉर्ड वाले किसी भी माओवादी को कोई रियायत सरकार की ओर से नहीं दी जाएगी और क़ानून अपना कार्य करेगा.
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को एक-एक हज़ार रुपए भी दिए गए.
राज्य के पुलिस महानिदेशक ओपी राठौर के अनुसार पिछले दो सालों में 117 नक्सली विद्रोहियों को पुलिस ने पकड़ा है और पिछले साल मुठभेड़ में नौ की मौत हुई है.