शनिवार, 30 दिसंबर, 2006 को 09:49 GMT तक के समाचार
भारत के विदेश राज्यमंत्री आनंद शर्मा ने सद्दाम हुसैन को फाँसी दिए जाने के फ़ैसले को निराशाजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. वामदलों और कुछ अन्य संगठनों ने भी इस कदम की कड़ी आलोचना की है.
आनंद शर्मा ने कहा कि भारत सरकार ने इराक़ की सरकार से अनुरोध किया था कि सद्दाम हुसैन को जान से नहीं मारा जाना चाहिए.
बीबीसी के मोहनलाल शर्मा से बातचीत में विदेश राज्यमंत्री ने कहा, "हम आशा करते हैं कि इस घटना से इराक़ में शांति बहाली और सामान्य स्थितियाँ कायम करने की जो कोशिशें हो रही हैं, उन पर असर नहीं पड़ेगा."
उन्होंने कहा कि इराक़ी में शांति बहाली में लगी ताकतों की यह प्राथमिकता होनी चाहिए कि वहाँ पर स्थितियाँ जल्द से जल्द सामान्य हो सकें.
आनंद शर्मा ने इस मुद्दे पर भारत सरकार का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा है कि भारत एक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक इराक़ के पक्ष में है.
'इराक़ में कठपुतली सरकार'
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता नीलोत्पल बसु ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि जिस जल्दबाज़ी के साथ सद्दाम को फाँसी दी गई है, उससे साफ़ हो गया है कि इराक़ की कठपुतली सरकार अमरीका और अमरीकी समर्थकों के सामने कितनी विवश है.
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नीलोत्पल बसु ने कहा, ''यह एक जघन्य न्यायिक हत्याकांड है. पहले से ही अशांत पश्चिम एशिया में इसकी काफ़ी मुखर प्रतिक्रिया होगी. हम अपने देश में लोकतांत्रिक और सभ्य लोगों से कह रहे हैं कि वे सड़कों पर आकर इसका विरोध करें.''
उन्होंने कहा कि हालाँकि सरकार ने सद्दाम को फाँसी की सज़ा का विरोध किया था लेकिन यह नाकाफ़ी है.हम चाहते हैं कि भारत अमरीका के साथ संबंधों पर नए सिरे से विचार करे.
कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने कहा, ''जो भी हुआ है वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. हमने पहले भी कहा था कि न्यायिक प्रक्रिया से यह कभी भी नहीं लगना चाहिए कि यह विजेता की कार्रवाई है.लेकिन आखिरकार वही हुआ.''
उन्होंने कहा, ''जिस तरह से फ़ैसला सुनाया गया और जल्दबाज़ी में फाँसी दी गई उससे न्यायिक प्रक्रिया पर शंका तो होती है. लेकिन हम इसकी निंदा ही कर सकते हैं.''
वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेता शाहनवाज़ हुसैन ने कहा कि उनकी पार्टी सद्दाम को फाँसी दिए जाने पर दुख व्यक्त करती है.
उन्होंने कहा कि हालांकि यह उनका अंदरूनी मामला है पर उन्हें फाँसी देकर बहुत अच्छा नहीं हुआ. बेहतर होता अगर उन्हें फाँसी न दी जाती.