शुक्रवार, 29 दिसंबर, 2006 को 12:18 GMT तक के समाचार
बांग्लादेश के पूर्व सैन्य शासक जनरल हुसैन मुहम्मद इरशाद ने अगले महीने होने वाले चुनावों में उनकी उम्मीदवारी पर लगी रोक के खिलाफ़ अपील की है.
बुधवार को चुनाव आयोग ने जनरल इरशाद की जातीय पार्टी को पाँच ज़िलों में संसदीय चुनाव लड़ने की अनुमति देने से मना कर दिया था.
पार्टी के महासचिव ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आयोग ‘लोकतांत्रिक मूल्यों’ के तहत उनकी अपील पर विचार करेगा.
पार्टी पर लगी रोक के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन में गुरूवार को लगभग पचास लोग घायल हो गए थे.
चुनाव आयोग ने कहा कि जनरल इरशाद भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए गए हैं इसलिए वे चुनाव लड़ने के अयोग्य हैं.
लेकिन जनरल इरशाद और उनके सहयोगी पार्टी अवामी लीग की नेता शेख हसीना ने आरोप लगाया है कि यह प्रतिबंध राजनीति से प्रेरित है.
लोकतांत्रिक मूल्य
जनरल इरशाद के वकीलों ने चुनाव आयोग में याचिका दी है जिसमें जनरल इरशाद पर लगी रोक हटाने की माँग की गई है.
जातीय पार्टी के महासचिव राहुल अमीन हालदार ने कहा, “हमें उम्मीद है कि आयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के तहत हमारी याचिका पर विचार करेगा और उन्हें चुनाव लड़ने की आज्ञा देने का कोई कानूनी रास्ता ढूँढ निकालेगा”.
पिछली संसद में जातीय पार्टी तीसरी सबसे बड़ी पार्टी थी.
जातीय पार्टी फिलहाल आवामी लीग की नेता शेख़ हसीना के नेतृत्व में बने चौदह दलों के विपक्षी गठबंधन का हिस्सा है.
पिछली प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया ने अक्तूबर में राष्ट्रपति इयाज़ुद्दीन अहमद के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार को अगले चुनावों तक के लिए सत्ता सौंप दी थी.
जनरल इरशाद ने वर्ष 1982 में तख्तापलट के बाद सत्ता पर कब्ज़ा किया था.
उन्होंने भ्रष्टाचार के कई आरोपों का सामना किया है और वे पाँच साल जेल में भी बिता चुके हैं.