गुरुवार, 28 दिसंबर, 2006 को 18:26 GMT तक के समाचार
मोनिका चड्ढा
बीबीसी संवाददाता,मुंबई
पुणे शहर के जौहरियों ने चेहरा ढक कर दुकान में आने वाली महिलाओं से सौदा न करने का फ़ैसला वापस ले लिया है.
पुणे और महाराष्ट्र सुनार संघ के अध्यक्ष फतहचंद रानका ने बीबीसी को बताया कि उनके फ़ैसले से धार्मिक भावनाएँ आहत होने की बात उठी जिसे देखते हुए वो इसे वापस ले रहे हैं.
महाराष्ट्र के पुणे शहर के सुनार संघ का कहना था कि हाल ही में तीन ऐसी घटनाएँ हुई जिनमें बुर्क़ा पहन कर दुकान में घुसी महिलाएँ लाखों रूपए के आभूषण चुरा कर चंपत हो गईं.
पुलिस भी इन महिलाओं की पहचान नहीं कर पाई क्योंकि चेहरा ढका होने के कारण दुकानों में लगे क्लोज सर्किट टीवी से भी कोई ख़ास मदद नहीं मिल सकी.
सुनार संघ ने राज्य सरकार को दिए प्रस्ताव में इस बात की अनुमति माँगी थी कि उन्हें दुकानों में डिस्पले बोर्ड लगाने दिया जाए जिस पर महिलाओं को चेहरा दिखाने की ताकीद लिखी होगी.
मिली जुली प्रतिक्रिया
मुस्लिम समुदाय ने इस पहल पर मिली जुली प्रतिक्रिया दी थी. महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन नसीम सिद्दिक़ी का कहना था कि इससे धार्मिक भावनाएँ आहत होंगी.
उन्होंने राज्य सरकार से सुनार संघ के इस फ़ैसले को नहीं मानने की अपील की.
अखिल भारतीय उलेमा काउंसिल के प्रवक्ता मौलाना सैयद अख़्तर अली ने कहा कि वो बुर्का पहनने वाली सभी महिलाओं से इन दुकानों में नहीं जाने की अपील करेंगे.
हालाँकि 'मुस्लिम्स फॉर सेक्युलर डेमोक्रेसी ग्रुप' के महासचिव जावेद आनंद का कहना है कि ये महज सुरक्षा से जुड़ा हुआ मामला है, कोई धार्मिक मुद्दा नहीं.
सुनार संघ का भी कहना था कि वो किसी ख़ास समुदाय को निशाना नहीं बना रही है बल्कि सुरक्षा के ज़रूरी उपाय कर रही है.
संघ के अध्यक्ष फतहचंद ने बीबीसी को बताया था कि उनके पास वीडियो रिकॉर्डिंग है जिसमें साफ़ दिख रहा है कि बुर्का पहनी महिला गहने चुरा रही है.
उन्होंने यह भी साफ किया कि ये प्रतिबंध सिर्फ़ बुर्का पहनने वाली महिलाओं पर ही लागू नहीं होगा बल्कि किसी भी तरीके से चेहरा ढकने वाली सभी महिलाएं इसके दायरे में आएंगी.