शनिवार, 23 दिसंबर, 2006 को 14:47 GMT तक के समाचार
सुशील झा
बीबीसी संवाददाता, फुलवरिया
बिहार के लोगों के लिए विकास एक मीठा सुखद सपना हो सकता है लेकिन बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद के गाँव में लोगों को सपने देखने की कोई ज़रूरत नहीं.
पटना से सिवान-गोपालगंज के डेढ़ सौ किलोमीटर की दूरी कहने को तो सड़क से पूरी की जाती है, लेकिन भूल कर भी कभी यहाँ के लोगों से 'सड़क' का ज़िक्र न कीजिएगा...लोग शायद शिष्टाचार के नाते ही आपको ग़ालियाँ न दें.
लेकिन गोपालगंज संसदीय क्षेत्र में लालू और राबड़ी देवी के घर की ओर रुख़ करें तो एकबारगी एहसास नहीं होता कि आप बिहार की सड़कों पर ही चल रहे हैं.
सिवान और गोपालगंज के रास्ते में पड़ता है मीरगंज विधानसभा क्षेत्र जहाँ से एक पतली सड़क निकलती है एक ही परिवार के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के गाँव की तरफ़.
वादा
इस सड़क पर चलकर एकबारगी लालू प्रसाद का वो वादा याद आता है जो उन्होंने कभी बिहार की सड़कों के बारे में किया था. लगता है अपने उस वादे को वो बस यहीं पूरा पाए.
लालू जी के ससुराल सलार से उनके गाँव फुलवरिया की दूरी चंद मिनटों में पूरी की जा सकती है.
फुलवरिया, जहाँ आज एक अस्पताल है, थाना है, बड़ा सा स्कूल है, दो भव्य मंदिर हैं और हाँ एक पावरहाउस भी है.
गाँव के लोगों को उनपर गुमान है, आखिर उनके शासन में ही तो गाँव का भरपूर विकास जो हुआ.
एक ग्रामीण शंकर राय कहते हैं, "यहाँ से जो भी विधायक जीता उसने कभी भी इस क्षेत्र का विकास नहीं किया लेकिन लालू जी ने खूब काम किया है. आप हर ओर विकास देख सकते हैं."
मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए इस ग्रामीण अंचल का विकास तो हुआ लेकिन अब लोग अपने रेल मंत्री से क्या चाहते हैं. ग्रामीणों ने एक रेलवे लाइन की मांग रखी. बस, लाइन बिछाने का काम शुरू कर दिया गया.
सही बात है... जब अपने गाँव का बबुआ रेल मंत्री हो तो गाँव के लोग आख़िर सड़क पर क्यों चलें.