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शुक्रवार, 22 दिसंबर, 2006 को 10:43 GMT तक के समाचार

नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर

बांग्लादेशियों को वापस भेजने पर विचार

राजस्थान सरकार कथित तौर पर ग़ैर-क़ानूनी रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को निकालने के उपायों पर सोच-विचार कर रही है.

राज्य के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया के अनुसार अकेले जयपुर में ही 50 हज़ार बांग्लादेशी रह रहे हैं.

हिंदू संगठनों ने सरकार के इस क़दम को सही ठहराया है लेकिन मुस्लिम संगठनों का कहना है कि इसके तहत बांग्ला बोलने वाले ग़रीब भारतीय मुसलमानों को भी निशाना बनाया जाएगा.

गृह मंत्री कटारिया ने बीबीसी को बताया कि सरकार कोई ऐसा उपाय सोच रही है जिससे अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को लौटाया जा सके क्योंकि बांग्लादेश इन्हें वापस लेने से इनकार कर रहा है.

गृह मंत्री के मुताबिक, ''जयपुर से बाहर राज्य के दूसरे हिस्सों में भी बांग्लादेशी घुसपैठिये रह रहे हैं. ऐसे लोगों की पहचान कराई जाएगी. यह एक बड़ी समस्या है.''

विरोध

विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष नरपत सिंह शेखावत कहते हैं, ''हम लगातार शासन से कहते रहे हैं कि इन ग़ैर-क़ानूनी बांग्लादेशियों को बाहर निकालें. ये लोग अपराध और दंगा-फ़साद में शामिल होते हैं. पहले भी सरकार ने जब जयपुर से निकालकर इन्हें बाहरी क्षेत्रों में आबाद किया तो हमने इसका पुरजोर विरोध किया था.''

जमाते इस्लामी के प्रदेश प्रमुख सलीम इंजीनियर कहते हैं, ''सरकार ग़ैर-कानूनी नागरिकों की निशानदेही करे तो हमें कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन सरकार का मकसद हिंदू-मुस्लिमों के बीच दीवार खड़ी करने का है. हमारा मानना है कि इसकी आड़ में बांग्ला जुबान बोलने वाले भारतीय मुसलमानों को निशाना बनाया जाएगा जो रोजी-रोटी की तलाश में जयपुर आते हैं. सरकार का ध्येय नुकसान पहुँचाने का है.''

इससे पहले वर्ष 2001 में सरकार ने एक सर्वे का हवाला देकर कहा था कि राज्य में 2,563 बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं. इनमें से ज्यादतर का जयपुर में रहना बताया गया था.

अब सरकार का कहना है कि इन ग़ैर-क़ानूनी नागरिकों को निकालने में कुछ प्रक्रियागत अड़चन है.