शुक्रवार, 22 दिसंबर, 2006 को 19:04 GMT तक के समाचार
फ़ैसल मोहम्मद अली
बीबीसी संवाददाता, भोपाल
मध्य प्रदेश सरकार राज्य के मुसलमानों के बीच ऐसी पुस्तक बंटवाएगी जिसमें जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाने की हिदायत क़ुरान के ज़रिए दी गई है.
“जनगणना, इस्लाम और परिवार नियोजन” नाम की इस पुस्तक में कुरान की कुछ आयतों को शामिल किया गया है और उनकी व्याख्या के साथ-साथ जनसंख्या नियंत्रण पर इस्लामिक बुद्धिजीवियों की राय भी शामिल की गई है.
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अजय बिश्नोई ने बीबीसी को बताया कि शुरुआत में इस किताब की दस हज़ार प्रतियाँ खरीदी जाएँगी.
इन प्रतियों को उन मुस्लिमों में बँटवाया जाएगा जो जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को नहीं अपना रहे हैं.
बिश्नोई ने कहा कि इस किताब में बताया गया है कि इस्लाम का जो तबका जनसंख्या नियंत्रण के उपायों का विरोध करता है वह इस्लाम को सही अर्थ में नहीं समझता.
नज़दीकी
इस किताब के लेखक मुज़फ़्फ़र हुसैन हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध मुंबई का एक संगठन उनकी किताब का प्रकाशक है.
आरएसएस और भाजपा लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि मुस्लिम जान-बूझकर ज़्यादा बच्चे पैदा कर रहे हैं जिसकी वजह से एक दिन हिंदू समुदाय अपने ही देश में अल्पसंख्यक बन जाएंगे.
मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की ही सरकार है और इसीलिए इस पुस्तक के वितरण के फ़ैसले को लेकर विवाद उठ रहे हैं.
भारत की हाल की जनगणना रिपोर्ट में पिछले दशक में मुस्लिम समुदाय में जन्म की दर कम तो हुई है लेकिन फिर भी वह हिंदू समुदाय की जन्म की दर से अधिक है.
आरएसएस के प्रमुख केएस सुदर्शन ने तो हिंदुओं से ज़्यादा बच्चे पैदा करने की अपील तक कर डाली जिससे कि मुस्लिमों की जनसंख्या वृद्धि की बराबरी की जा सके.
आलोचना
प्रसिद्ध हिंदी लेखक मंज़ूर एहतेशाम ने कहा कि जनसंख्या वृद्धि एक राष्ट्रीय समस्या है और उसे मुसलिम, हिंदू या सिख में बाँटना सही नहीं है.
एक स्थानीय मुस्लिम नेता नूरुल्लाह यूसुफज़ई ने कहा कि पुस्तक के लेखक ने जान-बूझकर कुरान की आयतों की गलत व्याख्या की है ताकि वह अपनी बात को सही सिद्ध कर सकें.
एक हिंदूवादी सामाजिक संस्था के सदस्य प्रसन्ना शर्मा ने कहा “जब यही पुस्तक गुजरात और काँग्रेस शासित राज्य महाराष्ट्र में सरकारी विभागों ने बाँटी है तो फिर मध्य प्रदेश सरकार के इस सही कदम का विरोध क्यों किया जा रहा है ”.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे मुस्लिम देश भी जनसंख्या नियंत्रण के लिए धार्मिक सहायता ले रहे हैं तो फिर यहाँ ऐसा क्यों नहीं हो सकता.
पाकिस्तान ने हाल ही में जन्म नियंत्रण के उपायों के लिए इस्लामिक गुरुओं की सहायता ली लेकिन इससे पहले धार्मिक नेताओं के बीच इसके लिए एक राय बनाई थी.