शुक्रवार, 22 दिसंबर, 2006 को 14:52 GMT तक के समाचार
केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय ने प्रस्ताव रखा है कि घरों में 11वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का व्यावसायिक कार्य कराने पर रोक लगाई जाए.
मंत्रालय का प्रस्ताव अब विशेषज्ञों की समिति के सामने पेश किया जा रहा है, उनकी राय लेने के बाद सरकार इस दिशा में क़दम उठा सकती है.
केंद्र सरकार पहले ही क़ानून बनाकर 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के नौकरी करने पर रोक लगा चुकी है और उन्हें होटलों, रेस्तराँओं और घरों में काम कराने वालों को सज़ा हो सकती है.
बच्चों के हितों के लिए काम करने वाली कई संस्थाओं का कहना है कि इस नए प्रस्ताव में भी आयु सीमा 14 वर्ष होनी चाहिए न कि ग्यारह वर्ष.
केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री रेणुका चौधरी ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि ऐसा करना आवश्यक है क्योंकि "बच्चों को संविधान ने हक़ दिया है कि वे भी अपना जीवन जी सकें, इसके लिए ज़रूरी है कि वे काम करने के बदले पढ़ाई पर ध्यान दें और उनका बचपन खुशहाल हो."
सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ भारत में लगभग सवा करोड़ बाल मज़दूर हैं लेकिन ग़ैर सरकारी संगठनों के मुताबिक़ यह संख्या छह करोड़ तक हो सकती है.
रेणुका चौधरी के इस प्रस्ताव पर मिली-जुली प्रतिक्रिया मिल रही है, कई ग़ैर-सरकारी संगठन इसका स्वागत कर रहे हैं लेकिन कुछ चिताएँ और आशंकाएँ भी हैं.
आर्थिक असर
ऐसी आशंकाएँ व्यक्त की जा रही हैं कि भारत में बहुत बड़े पैमाने पर कुटीर उद्योग चलते हैं जिनमें पूरे परिवार के सदस्य काम करते हैं अगर बच्चों को काम करने से रोका गया तो उसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.
एसोसिएटेड चैंबर ऑफ़ कॉमर्स (एसोचैम) के जीएस रावत कहते हैं, "इससे अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ेगा यह कहना मुश्किल होगा लेकिन इससे परिवारों की आय पर ज़रूर असर पड़ेगा. सरकार बच्चों को शोषण से बचाने के लिए ऐसा कर रही है इसलिए इसका स्वागत होना चाहिए."
लेकिन ऐसे लोग भी हैं जो इस प्रस्ताव को व्यावहारिक नहीं मानते हैं, राजस्थान के श्रम मंत्री करोड़ीमल मीणा कहते हैं, "मैं इस प्रस्ताव से सहमत नहीं हूँ, अभी इस पर विशेषज्ञों की राय आने दीजिए, अगर केंद्र सरकार इसे लागू कर दे तो हमें मानना पड़ेगा लेकिन इसमें कई समस्याएँ हैं."
रावत भी मानते हैं कि घर-घर में निगरानी करना और इसे लागू करा पाना व्यावहारिक स्तर पर संभव नहीं होगा लेकिन "अगर पचास प्रतिशत तक लागू किया जा सके तो भी बड़ी उपलब्धि होगी."
अभी तो यह एक प्रस्ताव ही है, सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार कितनी राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाती है.