शुक्रवार, 22 दिसंबर, 2006 को 18:25 GMT तक के समाचार
भारतीय जनता पार्टी ने केंद्र की यूपीए सरकार पर अल्पसंख्यकों की तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए संकेत दिए हैं कि पार्टी फिर हिंदुत्व की ओर लौटेगी.
लखनऊ में शुक्रवार से शुरु हुई तीन दिनों की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक की शुरुआत करते हुए राजनाथ सिंह ने केंद्र की यूपीए सरकार को 'छद्म धर्मनिरपेक्ष' कहा और आरोप लगाया कि सरकार 'आतंकवाद के प्रति नरमी' दिखा रही है.
भाजपा की इस बैठक को उत्तरप्रदेश में अगले साल के शुरु में होने वाले चुनावों के लिए प्रचार की शुरुआत के रुप में देखा जा रहा है.
एक बार फिर से अध्यक्ष चुने गए राजनाथ सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि पार्टी को अपनी छवि सुधारने पर ज़ोर देना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह दिखाना होगा कि पार्टी दूसरों से अलग है.
उन्होंने उत्तरप्रदेश की मुलायम सिंह सरकार पर भी अल्पसंख्यकों की तुष्टि के आरोप लगाए.
हिंदुत्व के लिए सीडी
भाजपा ने उत्तरप्रदेश चुनावों के प्रचार के लिए जो सीडी तैयार की है उसे एक बड़े संकेत के रुप में देखा जा रहा है.
इस सीडी से भाजपा साबित करना चाहती है कि केंद्र की यूपीए सरकार और राज्य की मुलायम सरकार मुलसमानों को ख़ुश करने की कोशिश कर रहे हैं.
इस सीडी में गायों को काटे जाने के दृश्य हैं और इसके अलावा आंतरिक सुरक्षा का मामला उठाकर भाजपा यह बताने जा रही है कि केंद्र सरकार कैसे समझौते कर रही है.
यह सब दिखाकर भाजपा हिंदुओं की भावना जगाकर अपने खेमे में वापस लाने का प्रयास करने जा रही है.
योजना है कि इस सीडी को गाँव-गाँव में दिखाया जाएगा.
उल्लेखनीय है कि नब्बे के दशक की शुरुआत में जब भाजपा ने पहली-पहली बार हिंदुत्व का सहारा लिया था तो कारसेवकों और रामजन्मभूमि समर्थकों के कैसेट बाँटे गए थे.
अगला प्रधानमंत्री कौन
कार्यकारिणी में भाजपा के सभी बड़े नेताओं के अलावा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के 3000 सदस्य और प्रमुख लोग एकत्रित हुए हैं.
इस भीड़ में एक बार फिर यह सवाल गरमा गया है कि अगला नेता कौन होगा या भाजपा की ओर से अगला प्रधानमंत्री कौन होगा.
पिछले दिनों पार्टी के पूर्व अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी के कथित बयानों के बाद कुछ विश्लेषक कहने लगे हैं कि आडवाणी ने साफ़ कर दिया है कि वे प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं.
इसी को संकेत मानते हुए पार्टी के एक वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने कहा है कि पार्टी में प्रधानमंत्री बनने लायक कई नेता हैं.
याद रहे कि अटल बिहारी वाजपेयी ने पिछले साल दिसंबर में हुआ कार्यकारिणी की बैठक के बाद घोषणा कर दी थी कि वे अब चुनावी राजनीति से अलग हो रहे हैं.