बुधवार, 20 दिसंबर, 2006 को 12:51 GMT तक के समाचार
भारत की एक महिला गणितज्ञ को रामानुजन पुरस्कार से नवाज़ा गया है. रामदोरई सुजाता को यह पुरस्कार प्रोफ़ेसर लिनार्ट कार्लेसन ने इटली के ट्राइस्टे में एक समारोह में दिया.
यह सम्मान विकासशील देशों के शोधकर्ताओं को दिया जाता है.
अब्दुस सलाम इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरिटिकल फ़िज़िक्स(आईसीटीपी) द्वारा शुरू किए गए इस पुस्कार के तहत दस हज़ार डॉलर दिए जाते हैं. इस पुरस्कार की शुरूआत पिछले वर्ष की गई थी.
प्रोफेसर सुजाता मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ंडामेंटल रिसर्च में कार्यरत हैं.
पुरस्कार
पुरस्कार का नामकरण भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के नाम पर किया गया है. पुरस्कार विकासशील देशों के 45 वर्ष आयु तक के गणितज्ञों को दिया जाता है.
प्रोफ़ेसर सुजाता को यह पुरस्कार अंकगणित के इवासवा सिद्धांत के लिए उनके योगदान पर दिया गया है.
प्रोफ़ेसर सुजाता ने कहा, "पिछले कुछ वर्षों में गणित के क्षेत्र में शोध करने वालों के लिए पुरस्कारों की भरमार हो गई है लेकिन इनमें से कोई भी विकासशील देशों के गणितज्ञों के लिए नहीं था".
उन्होंने कहा, "निश्चित तौर पर यह पुरस्कार विकासशील देशों के गणितज्ञों के लिए प्रेरणादायक साबित होगा".
प्रोफ़ेसर सुजाता ने अपनी पूरी शिक्षा भारत में हासिल की और वह 1985 से टाटा इंस्टीट्यूट के गणित विभाग में काम कर रही हैं.
उन्होंने कहा "मुमकिन है कि विकासशील देशों में अपने करियर के दौरान महिलाओं को कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ता है लेकिन मेरे सामने ऐसी कोई रुकावट नहीं आई".
इस अवसर पर आईसीटीपी के निदेशक केआर श्रीनिवासन ने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में विकास भी समग्र विकास का एक हिस्सा है लेकिन इनमें से किसी भी क्षेत्र का पीछे छूट जाना घातक है.