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बुधवार, 20 दिसंबर, 2006 को 03:56 GMT तक के समाचार

सुशील कुमार झा
बीबीसी संवाददाता, हाजीपुर से

एक सपना हाजीपुर का

गुड़गांव, फ़रीदाबाद और गाज़ियाबाद की तरह विकास का सपना हाजीपुर ने भी देखा था जो शायद पूरा नहीं हुआ लेकिन अभी भी उम्मीदें जीवित हैं.

दिल्ली से सटे इलाक़ों की तर्ज़ पर कभी पटना से सटे हाजीपुर के विकास की भी योजनाएँ बनी थीं लेकिन आज इस क्षेत्र की हालत ख़स्ता है.

बीबीसी को रोडशो जब हाजीपुर के आर एन कॉलेज पहुंचा तो बड़ी संख्या में युवा पहुंचे और पुरज़ोर आवाज़ में विकास की माँग की.

बहस का मुद्दा था- 'हाजीपुर का सपना, औद्योगिक केंद्र बने अपना'. शामिल होने वाले लोगों में ज़िला उद्योग केंद्र के परियोजना प्रबंधक नरेंद्र प्रसाद सिंह भी शामिल हुए लेकिन लोगों की नाराज़गी अधिकारियों के प्रति साफ दिखी.

सिंह का कहना था कि हाजीपुर में दो हज़ार से अधिक परियोजनाएं चलाई जा रही हैं लेकिन लोगों की राय थी कि इस बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है.

अनुकूल स्थितियाँ

डीएन पालीमर उद्योग से जुड़े उद्यमी रवींद्र सिंह का कहना था कि हाजीपुर में वो सभी चीज़ें हैं जो इसे औद्योगिक केंद्र बना सकती हैं.

मसलन मानव संसाधन, फल फूल पैदा करने के लिए उपजाऊ मिट्टी, पटना जैसा बाज़ार और लोगों में काम करने की लगन लेकिन नीतियों और सरकारी प्रोत्साहन की कमी है.

युवाओं ने पिछड़ेपन के लिए जहाँ भ्रष्टाचार, बिजली की कमी और शिक्षण संस्थाओं की कमी को कारण बताया वहीं कुछ छात्रों का यह भी कहना था कि इसके लिए स्थानीय लोगों को भी ज़िम्मेदारी लेनी होगी.

आम, लीची और केलों का शहर हाजीपुर उपेक्षित ज़रुर है पर निराश नहीं. उम्मीद की किरण जगमगाती है लेकिन धीमे-धीमे.

बिहार के लगभग हर कस्बे की कहानी ऐसी ही है लेकिन पटना से सटा यह इलाक़ा अपनी तमाम संभावनाओं के बावजूद पिछड़ा हुआ है और बाट जोह रहा है शायद पटना के विकास की जिससे संभवत उसका भी विकास हो सकेगा.