रविवार, 17 दिसंबर, 2006 को 22:23 GMT तक के समाचार
मणिकांत ठाकुर
बीबीसी संवाददाता, पटना
सीबीआई की पटना स्थित विशेष अदालत सोमवार को रेल मंत्री लालू यादव और राबड़ी देवी के ख़िलाफ़ आय से अधिक संपत्ति के मामले में फ़ैसला सुना सकती है.
बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी इस मामले में सह अभियुक्त हैं. इस मामले की लगभग आठ साल तक सुनवाई चली.
जानकारों का कहना है कि इस फ़ैसले के दूरगामी राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं.
यदि फ़ैसला लालू यादव के ख़िलाफ़ आता है तो उनके मंत्रिपद पर संकट आ सकता है. साथ ही केंद्र की यूपीए सरकार के लिए भी संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.
हाल में चार दिसंबर को इस मामले की सुनवाई पूरी हुई थी. इसके पहले चार अप्रैल, 2000 में इस मामले में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की थी.
मामला
दरअसल 1990 से 97 के बीच जब लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे, उस दौरान उनकी ज्ञात स्रोत से लगभग 46 लाख रुपए की अधिक संपत्ति रखने का पता चला था.
यह मामला 19 अगस्त, 1998 को सीबीआई ने दर्ज किया था. साथ ही इस मामले में राबड़ी देवी को भी सह अभियुक्त बनाया गया.
राबड़ी देवी पर आरोप है कि उन्होंने अपने पति लालू यादव को इस संपत्ति को अर्जित करने में सहयोग दिया.
इसके पहले लालू यादव और राबड़ी देवी ने पटना हाई कोर्ट में मुक़दमा चलाने की राज्यपाल की अनुमति देने को चुनौती दी थी. लेकिन अदालत ने उनकी याचिका ख़ारिज कर दी थी.
सन् 2000 में तत्कालीन राज्यपाल वीसी पांडे ने दोनों के ख़िलाफ़ आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई से मुक़दमा दायर करने को कहा था. इसके बाद सीबीआई ने एफ़आईआर दर्ज की थी.