शुक्रवार, 15 दिसंबर, 2006 को 12:05 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने सूबा सरहद में विवादास्पद क़ानून हिस्बा लागू करने की कोशिशों पर रोक लगा दी है.
कोर्ट ने प्रांतीय गवर्नर को निर्देश दिया है कि वो विवादास्पद विधेयक पर दस्तख़त ना करें. राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने भी इस विधेयक का विरोध किया है.
पिछले महीने सूबा सरहद की विधानसभा ने इस विधेयक को पारित कर दिया था. सूबा सरहद में धार्मिक पार्टियों के गठबंधन की सरकार है, जो तालेबान समर्थक माने जाते हैं.
पिछले साल भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह के विधेयक को असंवैधानिक घोषित कर दिया था. पिछले महीने कुछ संशोधन के साथ सूबा सरहद की विधानसभा ने हिस्बा को मंज़ूरी दे दी थी.
इस विधेयक के अंतर्गत ऐसे विभाग के गठन का प्रावधान किया गया था जिसका नेतृत्व इस्लामी मौलवी करने वाले थे.
इस विधेयक के अनुसार इस विभाग का गठन बुराई का अंत करने और अच्छाई का प्रचार करने के लिए किया गया है. लेकिन विपक्षी पार्टियों ने इस विधेयक का विरोध किया था.
विरोध
विपक्षी विधायकों का कहना है कि सत्ताधारी धार्मिक गठबंधन मुत्तहिदा मजलिस-ए-अमल (एमएमए) सूबा सरहद में एक ऐसा विभाग बनाना चाहता है जो पड़ोसी देश अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान शासनकाल के दौरान बनाए गए एक विभाग जैसा ही है.
विपक्ष का ये भी कहना है कि सरकार ने बिना उनकी सिफ़ारिश माने ही इस विधेयक को सदन में पेश कर दिया.
पिछले साल इस विधेयक को क़ानून बनने से इसलिए रोक दिया गया था क्योंकि पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस विधेयक के कुछ हिस्से असंवैधानिक थे.
लेकिन अब कई लोगों का मानना है कि नए विधेयक को थोड़ा नरम बनाया गया है. फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है.