शुक्रवार, 15 दिसंबर, 2006 को 13:45 GMT तक के समाचार
दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली पुलिस के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी को 20 साल पुराने मामले में मौत की सज़ा सुनाई है.
दिल्ली पुलिस के पूर्व सहायक आयुक्त आरपी त्यागी ने वर्ष 1987 में पुलिस हिरासत में रखे गए महिन्दर कुमार को इतना पीटा कि उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा जहाँ उनकी मौत हो गई.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जज राजिंदर कुमार ने आरपी त्यागी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 342 और 120-बी के तहत दोषी ठहराया.
अदालत ने त्यागी को 50 हज़ार रुपए की राशि जुर्माने के तौर पर जमा कराने का भी आदेश दिया है.
कोर्ट ने त्यागी की माफ़ी की उस याचिका को भी ख़ारिज कर दिया जिसमें अपील की गई थी कि उनकी उम्र 65 साल है और वे गंभीर रूप से बीमार हैं. इस मामले की जाँच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने की थी.
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इसी मामले में दिल्ली पुलिस के एक और पूर्व सहायक आयुक्त केपी सिंह और सब-इंस्पेक्टर तेज सिंह को त्यागी का साथ देने के लिए दोषी ठहराया गया है.
इन दोनों को मुख्य अभियुक्त त्यागी को सज़ा से बचाने और साक्ष्य मिटाने का दोषी पाया गया है. केपी सिंह को एक साल और तेज सिंह को तीन साल की कठोर क़ैद की सज़ा सुनाई गई है.
इसके अलावा कोर्ट ने केपी सिंह पर 25 हज़ार रुपए और तेज सिंह पर 30 हज़ार रुपए का जुर्माना भी लगाया है.
इस दोनों को त्यागी का साथ देने का दोषी ठहराते हुए जज ने कहा, "ये साबित हो चुका है कि इन दोनों ने अपने साथी पुलिस अधिकारी को सज़ा से बचाने के लिए संविधान के निर्देशों की अनदेखी की है."
अभियोग पक्ष के मुताबिक़ अगस्त 1987 में जनमाष्टमी के दिन महिन्दर कुमार का पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार इलाक़े में तैनात एक पुलिस कांस्टेबल से झगड़ा हो गया.
इस झगड़े के बाद उनके ख़िलाफ़ पुलिस कर्मचारी के साथ मारपीट का मामला दर्ज किया गया.
बाद में हिरासत में उनकी इतनी पिटाई की गई कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पडा जहाँ उनकी मौत हो गई.