शुक्रवार, 15 दिसंबर, 2006 को 04:42 GMT तक के समाचार
केंद्रीय सहायता प्राप्त उच्च शिक्षा संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को आरक्षण देने वाले विधेयक के पारित होने के विरोध में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के रेसीडेंट डॉक्टर भूख हड़ताल कर रहे हैं.
एम्स के डॉक्टर और छात्र शुरु से ही इस प्रावधान का विरोध कर रहे हैं और इससे पहले जुलाई में वे इसके ख़िलाफ़ लंबी हड़ताल कर चुके हैं.
उल्लेखनीय है कि पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने वाले इस विधेयक को गुरुवार को लोकसभा में पारित किया गया है.
इसके तहत इंडियन इस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलॉजी (आईआईटी), प्रबंधन संस्थानों इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट (आईआईएम) और एम्स जैसे संस्थानों में पिछड़ा वर्ग के छात्रों को 27 प्रतिशत आरक्षण मिल सकेगा.
एम्स के डॉक्टरों ने इसके विरोध में 12 डॉक्टरों ने भूख हड़ताल करने की घोषणा की है लेकिन कहा है कि इससे अस्पताल का कामकाज प्रभावित नहीं होगा.
डॉक्टरों ने कहा है कि वे भूखे रहेंगे लेकिन काम करते रहेंगे.
उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार ने सभी की हितरक्षा का जो आश्वासन दिया था वह उसे पूरा नहीं कर रही है.
समाचार एजेंसी यूएनआई के अनुसार रेसीडेंट्स डॉक्टर्स एसोसिएशन के डॉक्टर विनोद पात्रा ने कहा, "न तो सरकार ने हमारी माँगों पर विचार किया न मोइली समिति की सिफ़ारिशों को माना."
इससे पहले भी इस प्रावधान का देश भर के कई हिस्सों में व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों के छात्र विरोध करते रहे हैं.
विधेयक पारित
गुरुवार को लोकसभा ने इस विवादित विधेयक को पारित कर दिया है.
सरकार ने आश्वासन दिया है कि ग़ैर सरकारी उच्च शिक्षा संस्थानों में भी इसी तरह के आरक्षण के लिए जल्दी ही प्रावधान किए जाएँगे.
हालांकि सरकार ने विपक्ष की इस माँग को ठुकरा दिया कि अल्पसंख्यक संस्थानों में भी इसी तरह के आरक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिए.
संसद की स्थाई समिति ने कहा था कि इस विधेयक में प्रावधान किया जाना चाहिए कि आरक्षण का लाभ सिर्फ़ ग़रीब तबके के लोगों को मिले लेकिन सरकार ने इसे मंज़ूर नहीं किया.