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गुरुवार, 14 दिसंबर, 2006 को 12:17 GMT तक के समाचार

'जापान परमाणु ऊर्जा में सहयोग दे'

जापान की यात्रा पर गए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने परमाणु ऊर्जा समेत अन्य क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच साझेदारी मजबूत करने का आह्वान किया है.

टोक्यो में जापानी संसद डायट के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि खुले और सम्मिलित एशिया के निर्माण के लिए भारत और जापान के बीच मजबूत संबंधों का होना ज़रूरी है.

लगभग 600 संसद सदस्यों के समक्ष 25 मिनट के अपने भाषण में जापानी भावनाओं के अनुरूप ही प्रधानमंत्री ने परमाणु निरस्त्रीकरण का अपना संकल्प दोहराया.

उल्लेखनीय है कि 1998 में भारत के परमाणु परीक्षणों की जापान ने तीखी आलोचना की थी.

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे चाहते हैं कि जापान और दूसरे देश भारत में असैनिक परमाणु ऊर्जा को विकसित करने में सहयोग दें.

परमाणु सहयोग

प्रधानमंत्री ने भारत-अमरीका के बीच ऐतिहासिक परमाणु करार का ज़िक्र करते हुए कहा, "हम अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के बेहतर भविष्य के लिए जापान का सहयोग माँग रहे हैं."

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अपने लिखे भाषण से अलग हटते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, "साथ ही मैं यह फ़िर कहना चाहूँगा कि परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए भारत की प्रतिबद्धता बरकरार है."

ऐसा माना जा रहा है कि निरस्त्रीकरण पर जोर देने से शुक्रवार को जापानी प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे से उनकी मुलाक़ात काफी सकारात्मक हो सकता है.

ऊर्जा

इससे पहले जापान के ऊर्जा मंत्री अकीरा अमारी के साथ प्रधानमंत्री की बातचीत में इस बात पर सहमति बनी कि ऊर्जा संबंधी समस्याओं पर एक व्यापक बातचीत की शुरुआत हो.

इसके तहत दोनों देशों के बीच पहली मंत्रिस्तरीय बैठक अगले साल भारत में होगी.

मनमोहन सिंह ने जापान के वित्त मंत्री कोजी ओमी से भी बातचीत की और भारत में रेलवे के ज़रिए माल ढुलाई की बड़ी परियोजना में मदद करने की अपील की. जवाब में ओमी ने कहा कि जापान इस अनुरोध पर विचार करेगा.

एक स्थानीय अख़बार में छपे लेख में प्रधानमंत्री ने भारत में जापानी पूँजी निवेश बढ़ाने की भी अपील की है.