गुरुवार, 14 दिसंबर, 2006 को 14:14 GMT तक के समाचार
एशिया विकास बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ अगले 25 वर्षों में एशिया में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन तीन गुना बढ़ जाएगा.
इस रिपोर्ट में परिवहन और जलवायु परिवर्तन के बीच संबंध होने का विस्तृत विवरण दिया गया है.
रिपोर्ट के अनुसार ग्रीनहाउस गैसों के बारे में यह आकलन जितनी भयावह तस्वीर पेश करता है, वास्तविक स्थिति उससे भी गंभीर हो सकती है.
एशिया में सड़क यातायात से संबंधित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में एशिया के लोगों के पास व्यक्तिगत वाहनों की संख्या अपेक्षाकृत कम है, अगर है भी तो ज्यादातर लोगों के पास दुपहिया वाहन ही हैं.
लेकिन इन देशों में जिस तरह से लोगों की आय बढ़ रही है और शहरी आबादी भी फैल रही है उससे वाहनों की संख्या भी बढ़ने की संभावना जताई गई है.
रिपोर्ट के अनुसार चीन पहले ही विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और तीस सालों में वाहनों की संख्या आज के स्तर से 15 गुनी बढ़कर 19 करोड़ से भी अधिक हो जाने की संभावना है.
भारत में भी इसी अवधि के दौरान वाहनों में समान रूप से बढ़ोतरी होने की संभावना है.
गाड़ियों से कार्बन डाईऑक्साईड गैस के उत्सर्जन की मात्रा भी भारत में 3.4 गुना और चीन में 5.8 गुना बढ़ जाने की संभावना है.
पिछले महीने ब्रितानी विदेश मंत्री मारग्रेट बेकेट मे भारत से अनुरोध किया था कि वह जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों में सहयोग करे.
उनका बयान ब्रिटिश सरकार के उस रिपोर्ट के पहले आया था जिसमें ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने के लिए धनी देशों से तुरंत कार्रवाई करने को कहा गया था.
इस बीच इंडोनेशिया में हुए एक सम्मेलन में कहा गया कि हालाँकि कुछ एशियाई सरकारों ने गाड़ियों के उत्सर्जन मानकों को कड़ा बनाया है, कई देशों ने सीसा वाले गैसोलीन का इस्तेमाल भी रोक दिया है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि एशिया में बढ़ रहा प्रदूषण से प्रत्येक वर्ष 5 लाख 37 हजार लोगों की अकाल मृत्यू का कारण बन सकता है और हृदय और साँस संबंधी रोगों में भी बढ़ोत्तरी हो सकती है.