बुधवार, 13 दिसंबर, 2006 को 09:12 GMT तक के समाचार
भारतीय संसद पर हुए हमले के पाँच साल पूरे होने पर जहाँ संसद में आरोप-प्रत्यारोप हुआ है, वहीं इस घटना में मारे गए सुरक्षाकर्मियों के रिश्तेदारों ने उन्हें दिए गए पदक राष्ट्रपति को लौटा दिए हैं.
इस हमले के पाँच साल पूरे होने पर हर साल की तरह इस बार भी आधिकारिक समारोह हुए हैं. तेरह दिसंबर 2001 को हुए इस हमले में पाँच हमलावरों समेत 14 लोग मारे गए थे.
बुधवार को संसद के दोनो सदनों में मारे गए नौ सुरक्षाकर्मियों को याद किया गया और सांसदों ने दो मिनट का मौन रखा.
राज्यसभा में हंगामा
लेकिन इसी के साथ इस मामले में दोषी पाए गए मोहम्मद अफ़ज़ल की फाँसी की सज़ा पर राजनीति गरमाई और राज्यसभा में हंगामा हुआ जिसके बाद सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.
प्रमुख विपक्षी दल भाजपा और शिव सेना ने संसद में ये मामला उठाया जिसके बाद दोनो पक्ष एक दूसरे पर आरोप लगाने लगे और शोर इतना बढ़ गया कि काफ़ी देर राज्यसभा की कार्यवाही नहीं हो पाई.
जहाँ विपक्ष ने सदन में नारेबाज़ी की और अफ़ज़ल को तत्काल फ़ाँसी दिए जाने की माँग उठाई वहीं गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने इस मामले की तुलना राजीव गाँधी हत्याकांड से की.
उधर गृह राज्यमंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा कि हर व्यक्ति को अधिकार है कि वह माफ़ी या सज़ा घटाए जाने की माँग करे.
पदक राष्ट्रपति को लौटाए
दूसरी ओर 'एंटी टैररिस्ट फ़्रंट' के मनिंदरजीत सिंह बिट्टा के नेतृत्व में हमले में मारे गए सुरक्षाकर्मियों के रिश्तेदारों ने राष्ट्रपति भवन जाकर एक ज्ञापन सौंपा.
उनका कहना था कि मामले में दोषी पाए गए मोहम्मद अफ़ज़ल को न्यायिक आदेशानुसार फ़ाँसी दिए जाने में हो रही देरी के कारण वे अपने रिश्तेदारों को बहादुरी के लिए दिए गए पदक राष्ट्रपति को लौटा रहे हैं.
उनका कहना था कि यदि अफ़ज़ल की सज़ा घटाई जाती है तो ये उनके मृतक रिश्तेदारों की बहादुरी का मज़ाक उड़ाने जैसा होगा.
इन लोगों का कहना था कि इन पदकों को राष्ट्रीय संग्रहालय में सम्मानपूर्वक रखा जाए.