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बुधवार, 13 दिसंबर, 2006 को 04:34 GMT तक के समाचार

संसद पर हमले के मुद्दे पर राजनीति गरमाई

बुधवार को भारतीय संसद पर हुए हमले के पाँच साल पूरे होने पर जहाँ एक ओर संसद में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला है वहीं दोषी पाए गए मोहम्मद अफ़ज़ल की फाँसी की सज़ा पर राजनीति फिर गरमाई है.

भारतीय संसद पर 13 दिसंबर, 2001 को हुए हमले में सुरक्षा के लिए वहाँ तैनात नौ कर्मचारी मारे गए थे. संसद पर हमला करने वाले पाँचों हमलावर भी सुरक्षाकर्मियों के साथ गोलीबारी में मारे गए थे.

अब 'एंटी टैररिस्ट फ़्रंट' के अध्यक्ष एमएस बिट्टा ने आरोप लगाया है कि मोहम्मद अफ़ज़ल को फाँसी की सज़ा घटाने का समर्थन करने वाले मृतक सुरक्षाकर्मियों की 'क़ुरबानी का मज़ाक' उड़ा रहे हैं.

बीबीसी हिंदी के साथ बातचीत में उन्होंने दावा किया कि इस घटना में मारे गए सुरक्षाकर्मयों के परिजन बुधवार को राष्ट्रपति को वो पदक लौटा देंगे जो उनके मृतक रिश्तेदारों की बहादुरी के लिए प्रदान किए गए थे.

जिस समय संसद पर हमला हुआ तब संसद सत्र चल रहा था. सुबह भारतीय समयानुसार ग्यारह बजकर पचीस मिनट पर हैंड ग्रेनेड और एके-47 बंदूकों से लैस पाँच चरमपंथियों ने हमला किया.

समय रहते सतर्क सुरक्षाकर्मियों ने जान लिया कि दाल में कुछ काला है और हमलावरों को चुनौती देने पर दोनो पक्षों में गोलीबारी हुई जो लगभग आधे घंटे तक चली.

संसद में आरोप-प्रत्यारोप

हाल में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दोषी पाए गए मोहम्मद अफ़ज़ल की मौत की सज़ा बरक़रार रखी थी.

उनकी पत्नी ने राष्ट्रपति से इस सज़ा को घटाने की गुहार लगाई थी और कुछ मानवाधिकार संगठन भी उनके बचाव में आगे आए थे.

उनका कहना था कि अफ़ज़ल को इंसाफ़ नहीं मिला क्योंकि मुकदमे की शुरुआत में उन्हें वकील की सेवा तक नहीं मिली.

लेकिन प्रमुख विपक्षी दल भाजपा, शिव सेना और कई अन्य लोगों ने इसका विरोध किया है.

मंगलवार को भाजपा ने सवाल उठाया कि इस मामले में राष्ट्रपति के सामने आई याचिका पर फ़ैसला करने में देरी क्यों हो रही है. भाजपा के सदस्यों ने इस मामले पर 'वॉकआउट' किया यानि सदन से उठ कर बाहर चले गए.

उधर गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि याचिक हाल में आई है और इस प्रक्रिया में फ़ैसला लेते समय गृह मंत्रालय और क़ानून मंत्रालय विचार रखते हैं जिसमें कुछ समय लगता है.

मृतकों के परिजन

दूसरी ओर एमएस बिट्टा ने बीबीसी को बताया कि मृतक सुरक्षाकर्मियों के परिवार किसी राजनीतिक मंच से नहीं जुड़े हैं. उनका आरोप था कि अफ़ज़ल की सज़ा घटाना मृतक सुरक्षाकर्मियों की क़ुरबानी का मज़ाक होगा.

उनका कहना था कि राष्ट्रपति को इस बारे में एक ज्ञापन सौंपा जाएगा और पूरे सम्मान के साथ मृतकों के परिजनों को प्रदान किए गए पदक राष्ट्रपति को सौंप दिए जाएँगे.

समाचार एजेंसियों के अनुसार इन ख़बरों के फैलती ही प्रशासन से जुड़े कुछ लोगों ने मृतक सुरक्षाकर्मियों के परिजनों को मनाने की कोशिश की है लेकिन इस मामले में पूरी स्थिति बुधवार दिन के दौरान ही स्पष्ट होगी.