बुधवार, 13 दिसंबर, 2006 को 07:24 GMT तक के समाचार
एक ताज़ा अध्ययन के मुताबिक भारत में एचआईवी संक्रमण या एड्स के मामलों की संख्या का अनुमान लगाने के तरीके सही नहीं हैं और संभव है कि भारत में सक्रमण के असल मामले काफ़ी कम हों.
संयुक्त राष्ट्र का आकलन है कि भारत में एचआईवी संक्रमित लोगों की संख्या सबसे अधिक है और ये 57 लाख है.
ब्रितानी पत्रिका बीएमसी मेडिसिन में एक अध्ययन के अनुसार भारत में एचआईवी संक्रमित मामले संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक अनुमान के मुकाबले में केवल 40 प्रतिशत हो सकते हैं.
इस पर स्वास्थ्य अधिकारियों की मिश्रित प्रतिक्रिया आई है.
हाल में पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भारत को एचआईवी और एड्स महामारी का केंद्र कहा था.
'कुल संख्या 32-35 लाख'
ब्रितानी पत्रिका का शोध आंध्र प्रदेश के एक ज़िले के अध्ययन पर आधारित है जो इससे बहुत बुरी तरह से ग्रस्त है.
जाँचकर्ताओं ने गुंटूर ज़िले में 15 साल से 49 साल के बीच 12 हज़ार 617 लोगों के ख़ून के नमूने एकत्र किए.
जाँचकर्ताओं ने पाया कि गुंटूर में 45 हज़ार 900 लोग एचआईवी से ग्रस्त हैं जबकि आधिकारिक तरीकों के मुताबिक वहाँ एक लाख 12 हज़ार से ज़्यादा लोग इससे ग्रस्त हैं.
इस ब्रितानी पत्रिका के अनुसार पूरे भारत में 32 लाख से लेकर 35 लाख के बीच लोग एचआईवी से संक्रमित हैं.
अध्ययन के अनुसार, "हो सकता है कि आधिकारिक तरीकों के इस्तेमाल से भारत एचआईवी संक्रमण के शिकार लोगों की संख्या को कहीं अधिक बता रहा हो."
शोधकर्ता डॉक्टर ललित डांडोना का कहना था कि उनका मानना है कि जानबूझकर ये संख्या बढ़ा-चढ़ाकर नहीं पेश की जा रही लेकिन आधिकारिक तरीके से ग़लत तस्वीर मिल रही है.
उधर संयुक्त राष्ट्र के एड्स संबंधित विभाग के भारत प्रमुख डॉक्टर डेनिस ब्रॉन का कहना था कि ये अध्ययन लाभदायक तो है लेकिन ये ज़रूरी नहीं कि जो गुंटूर में सही था वह पूरे भारत के लिए ठीक हो.