मंगलवार, 12 दिसंबर, 2006 को 19:09 GMT तक के समाचार
हैदराबाद के पास स्थित अलवल में एक चार वर्ष के बच्चे को केवल इस वजह से स्कूल से बाहर निकाल दिया गया क्योंकि वो एचआईवी संक्रमित था.
यह बच्चा इस क्षेत्र में स्थित एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में पढ़ रहा था.
बताया जा रहा है कि स्कूल में पढ़ रहे अन्य बच्चों के अभिभावकों ने इस बच्चे को स्कूल में पढ़ाने का विरोध किया जिसके बाद स्कूल की ओर से इसे घर भेज दिया गया है.
इस बच्चे की माँ जयलक्ष्मी ने समाचार एजेंसी रायटर्स को बताया कि स्कूल के अध्यापकों ने उन्हें अपने बच्चे को कहीं और ले जाने के लिए कहा क्योंकि अन्य बच्चों के अभिभावक इस बच्चे पर आपत्ति कर रहे थे.
वेंकटेश युवजन संगम नर्सरी नाम के इस स्कूल को चलाने वाली स्वरूपा बताती हैं कि उनपर अन्य अभिभावकों का दबाव था जिसके चलते उन्हें इस बच्चे को निकालना पड़ा.
उन्होंने बताया, "अन्य अभिभावक अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे और उन्होंने धमकी दी कि अगर इस बच्चे को स्कूल से नहीं निकाला गया तो इस स्कूल को बंद करवा दिया जाएगा."
स्कूल के इस क़दम के बाद जयलक्ष्मी एक ग़ैर-सरकारी संगठन की मदद से अपने बच्चे को एचआईवी संक्रमित बच्चों के लिए चलाए जाने वाले एक विशेष स्कूल में दाखिला दिलाने की कोशिश कर रही हैं.
जयलक्ष्मी को एचआईवी का संक्रमण अपने पति से मिला जिनका एड्स की बीमारी के चलते तीन वर्ष पहले ही निधन हो चुका है.
चिंता
दुनियाभर में एचआईवी से ग्रस्त लोगों की सबसे बड़ी संख्या भारत में है और ऐसे बच्चों को स्कूल से निकालने का यह पहला मामला नहीं है.
इससे पहले इसी महीने की शुरुआत में केरल के एक स्कूल में पाँच बच्चों को इसलिए स्कूल छोड़ने के लिए कह दिया गया था क्योंकि वे एचआईवी संक्रमित थे और अन्य बच्चों के अभिभावक उन्हें स्कूल में पढ़ाने का विरोध कर रहे थे.
दो वर्ष पहले ऐसा ही एक मामला तब सामने आया था जब स्कूल से निकाले गए दो एचआईवी संक्रमित बच्चों को उन्हें दोबारा दाखिला दिए जाने के लिए भूख हड़ताल पर जाना पड़ा.
हाल ही में पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भारत दौरे के दौरान चेताया था कि भारत दुनियाभर में एड्स का केंद्र बनता जा रहा है.
संयुक्त राष्ट्र के एक आकलन के मुताबिक भारत में लगभग 57 लाख लोग एचआईवी संक्रमित हैं.