सोमवार, 11 दिसंबर, 2006 को 06:10 GMT तक के समाचार
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 'देश के संसाधनों पर मुसलमानों का पहला हक़' संबंधी बयान पर संसद में भाजपा सदस्यों ने भारी हंगामा और नारेबाजी की जिसके कारण संसद की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.
ज्यों ही लोक सभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरु हुई भाजपा सदस्यों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से उनके बयान के लिए माफ़ी माँगने की माँग की.
लोकसभा में प्रश्नकाल की शुरुआत होते ही हंगामा शुरू हो गया. भाजपा नेता वीके मल्होत्रा खड़े हुए और वो अपनी बात रखना चाह रहे थे.
लोकसभा सोमनाथ चटर्जी ने कहा कि प्रश्नकाल के बाद उन्हें अपनी बात रखने का समय दिया जाएगा.
लेकिन भाजपा सांसद इस पर संतुष्ट नहीं हुए और अध्यक्ष के बार-बार अनुरोध के बावजूद पहले अपनी जगह पर खड़े हो गए और फिर अध्यक्ष के आसन की और बढ़े.
लोक सभा अध्यक्ष कुछ देर तो अनुरोध करते रहे लेकिन फिर उन्होंने लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी.
राज्यसभा में नारेबाजी
राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर भारी हंगामा हुआ. सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा सदस्य माँग करने लगे कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सदन में आएँ और स्पष्टीकरण दें.
इस दौरान भाजपा सांसद नारे लगा रहे थे- प्रधानमंत्री माफ़ी माँगो, प्रधानमंत्री सदन में आओ, देश को सारी बात बताओ.
इसके बाद भाजपा सदस्य सभापति भैरोंसिंह शेखावत के आसन के नज़दीक आ गए और नारेबाजी और तेज़ हो गई.
इस दौरान 'काँग्रेस की साँप्रदायिक राजनीति नहीं चलेगी और देश को बाँटो मत' जैसे नारे लग रहे थे.
भाजपा की ओर से जसवंत सिंह, सुषमा स्वराज, मुरली मनोहर जोशी, वैंकया नायडू अपनी बात कहने की कोशिश कर रहे थे लेकिन हंगामे के कारण कुछ सुनाई नहीं दे रहा था.
राज्यसभा में भाजपा का साथ शिव सेना के सदस्य भी देते नज़र आए.
ग़ौरतलब है कि शनिवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में कहा था कि समाज के सभी पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों विशेषकर मुसलमानों को विकास के लाभ में बराबर की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए उनका सशक्तिकरण किए जाने की ज़रूरत है. देश के संसाधनों पर पहला हक़ उन्हीं का है.
प्रधानमंत्री की इसी पंक्ति को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया. हालांकि बाद में प्रधानमंत्री कार्यालय ने मनमोहन सिंह के बयान पर सफ़ाई दी और कहा कि उनके बयान को संदर्भ से हटकर इस्तेमाल किया गया है.
प्रधानमंत्री सभी अल्पसंख्यकों की बात कर रहे थे, केवल मुसलमानों की बात नहीं कर रहे थे.