रविवार, 10 दिसंबर, 2006 को 05:38 GMT तक के समाचार
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) में दिए अपने भाषण में 'संसाधनों पर पहला हक़ मुसलमानों' का कहने से विवाद उत्पन्न हो गया है. भाजपा ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है.
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में समाज के सभी पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों विशेषकर मुसलमानों को विकास के लाभ में बराबर की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए उनका सशक्तिकरण किए जाने की बात कही.
साथ ही उन्होंने कहा कि देश के संसाधनों पर पहला हक उन्हीं का है. उनकी इस पंक्ति को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया.
ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना और विकास पर चर्चा के लिए बुलाई गई राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी के बाद एनडीसी जैसे एक राजनीतिक मंच बन गया.
जानकारों का कहना है कि कुछ राज्यों के चुनाव पास होने के कारण इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया.
बैठक के दौरान ही भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने प्रधानमंत्री के बयान पर कड़ा विरोध जताया.
बाद में प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता संजय बारू ने मनमोहन सिंह के बयान पर सफ़ाई दी और कहा कि वो सभी अल्पसंख्यकों की बात कर रहे थे, केवल मुसलमानों की बात नहीं कर रहे थे.
भाजपा का विरोध
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, मध्य प्रदेश के शिवराज सिंह चौहान और छत्तीसगढ़ के रमन सिंह ने प्रधानमंत्री के बयान को देश की एकता-अखंडता के लिए घातक बताया.
दूसरी ओर कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री के समर्थन में आ गए.
भाजपा नेता विजय कुमार मल्होत्रा ने बीबीसी के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री के अल्पसंख्यकों को संसाधनों पर पहला हक़ दिए जाने की बात को अनुचित और आपत्तिजनक बताया.
उनका कहना था कि प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के चुनावों को ध्यान में रखकर यह बात कही है जो इस फ़ोरम का दुरुपयोग है.
राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ ने भी प्रधानमंत्री के बयान की आलोचना की है. संघ के नेता राम माधव का कहना था कि हमारे नेताओं ने विभाजन से कोई सबक नहीं सीखा है.
इससे पहले प्रधानमंत्री ने सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं. उन्होंने खेती, सिंचाई, जल संसाधन, स्वास्थ्य शिक्षा, ग्रामीण विकास और आधारभूत ढांचे में निवेश की ज़रूरत बताई.
साथ ही अनुसूचित जाति और जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, महिला और बाल विकास के लिए और संसाधन उपलब्ध कराए जाने की बात कही.