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रविवार, 10 दिसंबर, 2006 को 10:42 GMT तक के समाचार

विरोध प्रदर्शनों के कारण सेना तैनात

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को देखते हुए बड़ी संख्या में सैनिकों को तैनात किया गया है. बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच अधिकारियों को हिंसा की आशंका है.

अगले महीने बांग्लादेश में संसदीय चुनाव होने वाले हैं. सरकार ने एहतियाती क़दम उठाते हुए राष्ट्रपति इयाजुद्दीन अहमद के सरकारी निवास के बाहर होने वाले विरोध प्रदर्शनों पर पाबंदी लगा दी है.

अक्तूबर में राष्ट्रपति इयाजुद्दीन अहमद ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख का पद संभाला था. लेकिन उसके बाद हिंसा की घटनाओं में बड़ी संख्या में लोग मारे गए हैं और विरोध प्रदर्शन भी तेज़ हुए हैं.

विपक्षी पार्टी आवामी लीग मांग कर रहे हैं कि देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए कई क़दम उठाए जाने की आवश्यकता है. रविवार को ही पार्टी ने एक बड़ी रैली का आह्वान किया था लेकिन अब उसे टाल दिया गया है.

आवामी लीग का कहना है कि मांगें पूरी होने तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.

एहतियाती क़दम

अंतरिम सरकार ने राजधानी ढाका के कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण इलाक़ों में सैनिकों को तैनात किया है. ढाका के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी सेना गश्त लगा रही है.

बांग्लादेश में 23 जनवरी को चुनाव होने वाले हैं. सैनिकों की तैनाती के बारे में गृह मंत्रालय ने एक बयान जारी किया है. इस बयान में कहा गया है- आम जनजीवन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए सेना को तैनात किया गया है ताकि नागरिक प्रशासन सुचारु रूप से चल सके.

हाल के दिनों में विपक्षी आवामी लीग और अन्य पार्टियों ने चुनाव सुधारों की मांग करते हुए कई बार राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किया है.

इन पार्टियों का आरोप है कि मतदाता सूची बहुत पुरानी है और चुनाव आयोग के कुछ सदस्य निष्पक्ष नहीं हैं. पार्टियों का आरोप है कि चुनाव आयोग के सदस्य ख़ालिदा ज़िया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के प्रति सहानुभूति रखते हैं.

पिछले सप्ताह ही बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने कहा था कि लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों के कारण मतदान दो दिनों के लिए टाला जा रहा है. पहले मतदान 21 जनवरी को होना था लेकिन अब ये 23 जनवरी को होगा.

प्रधानमंत्री के रूप में ख़ालिदा ज़िया का कार्यकाल 28 अक्तूबर को ख़त्म हो गया था. इसके बाद राष्ट्रपति इयाजुद्दीन अहमद कार्यवाहक सरकार के प्रमुख बने थे.

उनका कार्यकाल ख़त्म होने के बाद विरोध प्रदर्शनों में अभी तक 44 लोगों की मौत हो चुकी है. बांग्लादेश के संविधान के मुताबिक़ कार्यवाहक सरकार को 90 दिनों के अंदर चुनाव कराना ज़रूरी होता है.