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शुक्रवार, 08 दिसंबर, 2006 को 12:01 GMT तक के समाचार

पिछड़े वर्ग के धनी लोगों को भी आरक्षण

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फ़ैसला किया है कि केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) के धनी लोगों को भी आरक्षण का फ़ायदा मिलेगा.

केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़े वर्गों के लिए 27 फ़ीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है.

सत्ताधारी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार ने संसदीय समिति की उन सिफ़ारिशों को नामंज़ूर कर दिया है जिसमें कहा गया था कि अन्य पिछड़े वर्गों के धनी लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए.

कैबिनेट की बैठक के बाद सूचना और प्रसारण मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने बताया, "सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद यह फ़ैसला किया गया है कि अन्य पिछड़े वर्गों के आरक्षण के लिए मूल विधेयक में कोई बदलाव नहीं होगा."

मुसलमान

कैबिनेट ने यह भी फ़ैसला किया है कि थोड़े से बदलाव के साथ यह विधेयक संसद के मौजूदा सत्र में ही पेश किया जाएगा. विधेयक में मुसलमानों के पिछड़े वर्गों को भी आरक्षण की बात जोड़ी गई है.

संसदीय समिति ने कहा था कि अन्य पिछड़े वर्गों के ग़रीब लोगों को पहले आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए और क्रीमी लेयर यानी धनी लोगों के लिए बाद में विचार होना चाहिए.

लेकिन संसदीय समिति की उस सिफ़ारिश को मंत्रिमंडल ने स्वीकार कर लिया है जिसमें सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े मुसलमानों के लिए भी व्यवस्था होनी चाहिए.

सरकार को बाहर से समर्थन दे रही वामपंथी पार्टियों ने आरक्षण से अन्य पिछड़े वर्ग के धनी लोगों को बाहर रखने का समर्थन किया था लेकिन राष्ट्रीय जनता दल और डीएमके इसके ख़िलाफ़ थी.

जानकार कांग्रेस के इस फ़ैसले को उत्तर प्रदेश चुनाव से भी जोड़कर देख रहे हैं. अगले साल के शुरू में ही उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.