चार्ल्स हैविलैंड
बीबीसी न्यूज़, काठमांडू
नेपाल में राजशाही के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब राजा को टैक्स देना पड़ा है. संसद की घोषणा के बाद नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र और राजकुमार पारस को आयात कर देना पड़ा है.
मई में संसद ने घोषणा की थी कि राजा की संपत्ति और उनकी आय को क़ानून के मुताबिक़ कर के दायरे में लाया जाएगा.
अमरीका से नेपाल नरेश के नाम पर भेजे गए 50 इलेक्ट्रिक टॉर्च और ऑस्ट्रिया से राजकुमार पारस के लिए भेजी गई एक सोने की ट्रॉफ़ी पर क़रीब 1800 डॉलर यानी क़रीब 90 हज़ार रुपए का आयात कर लगाया गया.
राजकुमार पारस के लिए भेजी गई सोने की ट्रॉफ़ी तीन महीने से हवाई अड्डे पर पड़ी थी क्योंकि राजमहल के कर्मचारी कर नहीं दे पाए थे. पहले नेपाली संविधान के मुताबिक़ राजघराने को किसी तरह के टैक्स से मुक्त रखा गया था.
घोषणा
लेकिन मई में नेपाली संसद ने घोषणा की थी कि राजा को आम नागरिक की तरह टैक्स देना पड़ेगा.
अभी ये पता नहीं चल पाया है कि राजा ने इतने इलेक्ट्रॉनिक टॉर्च क्यों मंगाए हैं. हालाँकि नेपाल में जाड़े के दिनों में बिजली की सप्लाई में कटौती अभी शुरू ही हुई है.
ऐसा नहीं है कि नेपाल नरेश पहले ऐसे राजा हैं जिन्हें टैक्स देना पड़ रहा है. ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ भी पिछले 15 सालों से ही ऐसा कर रही हैं.
हालाँकि नेपाल नरेश के लिए स्थितियाँ भिन्न हैं क्योंकि हाल के दिनों में अंतरिम सरकार के कई फ़ैसले उनके ख़िलाफ़ गए हैं और उनकी स्थिति भी कमज़ोर हुई है.
नए फ़ैसलों के मुताबिक़ राजा की ज़मीनों का राष्ट्रीयकरण होगा और नेपाल नरेश का उत्तराधिकारी चुनने का अधिकार भी संसद के पास होगा.
हाल में ही एक जाँच में यह भी पाया गया था कि अप्रैल में प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हुई कार्रवाई के लिए नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ही ज़िम्मेदार थे.