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शुक्रवार, 08 दिसंबर, 2006 को 17:53 GMT तक के समाचार

'सामूहिक क़ब्र की सीबीआई जाँच नहीं'

गुजरात के उच्च न्यायालय ने उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें सामूहिक क़ब्र की जाँच की माँग की गई थी कि वह 2002 के दंगों में मारे गए लोगों की है.

यह याचिका सिटीज़न्स फ़ॉर जस्टिस एंड पीस नाम के एक मानवाधिकार संगठन ने दायर की थी.

संस्था के साथ पांडरवारा गाँव के लोग भी थे जिनका दावा है कि वे उन लोगों के रिश्तेदार हैं जिनके शव सामूहिक क़ब्र में मिले हैं.

याचिका में कहा गया था कि मारे गए लोग मुसलमान थे और उन्हें 2002 के सांप्रदायिक दंगों के दौरान मारा गया था.

उल्लेखनीय है कि उन दंगों में गुजरात भर में एक हज़ार से अधिक मुसलमानों की मौत हुई थी.

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें राज्य की पुलिस पर भरोसा नहीं है और सामूहिक क़ब्र के मामले की जाँच केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई से करवाई जानी चाहिए.

उच्च न्यायालय ने इस आधार पर याचिका को खारिज कर दिया कि पिछले सात महीनों में सीबीआई ने इस मामले की जाँच शुरु करने की कोई पहल नहीं की है.

एक स्थानीय अदालत के आदेश पर सीबीआई ने पहले ही इस क़ब्रिस्तान से डीएनए के नमूने लिए थे और इसी उद्देश्य के लिए स्थानीय मुसलमानों के ख़ून के नमूने भी लिए गए थे.

फ़ोरेंसिक लैब ने जो रिपोर्ट दी थी उसके अनुसार कुछ नमूने स्थानीय लोगों से मिलते थे लेकिन आगे जाँच का जिम्मा राज्य की पुलिस को सौंप दिया गया.

उल्लेखनीय है कि पिछले साल दिसंबर में एक सामाजिक कार्यकर्ता की उपस्थिति में पांडरवारा स्थानीय लोगों ने नदी के किनारे से कुछ शव निकाले थे. इसमें कुल आठ खोपड़ियाँ निकाली गईं थीं.

स्थानीय लोगों का दावा था कि ये शव दंगों में मारे गए लोगों के थे.