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गुरुवार, 07 दिसंबर, 2006 को 02:47 GMT तक के समाचार

निक चाइल्ड्स
बीबीसी विश्व मामलों के संवाददाता

अफ़ग़ानिस्तान के लोगों में भरोसे की कमी

अफ़ग़ानिस्तान में हुए एक ताज़ा सर्वेक्षण से पता चला है कि देश के भविष्य के बारे में लोगों की उम्मीदों में भारी कमी आई है.

बीबीसी और अमरीकी एबीसी टेलीविज़न नेटवर्क ने संयुक्त रूप से एक सर्वेक्षण कराया है जिसमें केवल आधे से थोड़े अधिक लोगों ने राय व्यक्त की है कि अफ़ग़ानिस्तान सही दिशा में बढ़ रहा है.

सर्वेक्षण में साफ़ दिखता है कि पिछले साल भर में भविष्य को लेकर अफ़ग़ानिस्तान की जनता के आत्मविश्वास में बहुत कमी आई है.

मसलन, ऐसे लोगों की संख्या 77 प्रतिशत से घट कर मात्र 55 प्रतिशत रह गई है, जोकि मानते हैं कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है.

इसी तरह देश में सुरक्षा व्यवस्था को तालेबान काल से बेहतर मानने वालों की संख्या भी 75 प्रतिशत से घट कर 58 फ़ीसदी रह गई है.

अफ़ग़ानिस्तान के सौ में से मात्र 58 लोग ही अपना बेहतर भविष्य देखते हैं यानि अच्छे भविष्य की उम्मीद रखने वालों की संख्या में 13 प्रतिशत की कमी आई है.

यदि अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिणी सूबों हेलमंद और कंधार की बात करें तो स्थिति और भी ख़राब है.

नैटो और तालेबान बलों का संघर्ष क्षेत्र बने इन इलाक़ों में दस में से मात्र चार लोग ही मानते हैं कि भविष्य में परिस्थितियों में सुधार हो सकता है. यानि, साल भर पहले की तुलना में यह संख्या आधी रह गई है.

सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता

इस सर्वेक्षण में एक हज़ार से अधिक लोगों से बातचीत की गई.

अब 10 में से केवल चार लोग ही सोचते हैं कि हालात सही दिशा में जा रहे हैं. लगभग 80 फ़ीसदी लोगों का मानना है कि सुरक्षा व्यवस्था ख़राब है.

लोगों की यह राय बनी रही तो यह अफ़ग़ानिस्तान, अमरीका और ब्रितानी प्रशासन के लिए चिंताजनक है.

दूसरी ओर ऐसे लोगों की भी बड़ी संख्या है जो अमरीकी नेतृत्ववाले सेनाओं के हमले, विदेशी सैनिकों की मौजूदगी और मौजूदा अफ़ग़ान सरकार को तालेबान की तुलना में बेहतर मानते हैं.

लेकिन 80 फ़ीसदी से अधिक लोग सरकार के भ्रष्टाचार को लेकर चिंतित हैं.

विदेशी नीति निर्माताओं के लिए यह बात सिरदर्द साबित हो सकती है कि एक साल में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ी है जो अफ़ीम की खेती को उचित मानते हैं.

इस सर्वेक्षण के अनुसार तालेबान को बहुत सीमित समर्थन हासिल है. लेकिन पिछले साल की तुलना में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ी जो मानते हैं कि अफ़ग़ानिस्तान को तालेबान से ख़तरा है.