श्रीलंका में मंत्रिमंडल ने कड़े आपातकाल प्रावधानों की घोषणा की है जिनका लक्ष्य तमिल विद्रोहियों और उनके समर्थकों की गतिविधियों पर रोक लगाना है.
इन नियमों के मुताबिक पुलिस और सुरक्षा बलों को व्यापक अधिकार दिए गए हैं. इनके तहत गिरफ़्तारी के व्यापक अधिकार के साथ-साथ संदिग्ध लोगों को कई महीने तक बिना मुकदमें के हिरासत में रखने का अधिकार है.
लेकिन मंत्रिमंडल ने तमिल विद्रोहियों के संगठन एलटीटीई पर सीधे-सीधे प्रतिबंध नहीं लगाया है चाहे वह उसके काफ़ी करीब पहुँच गया.
कुछ पर्यवेक्षकों का कहना है कि इससे कभी चलती और कभी रुकती हुई शांति प्रक्रिया में दोबारा जान फूँकने की संभावना बनी रहती है.
हिंसा के बीच आए प्रावधान
मंत्रिमंडल का ये फ़ैसला सरकार और विद्रोहियों के बीच कई महीने से बढ़ रही हिंसा के बीच आया है.
इस साल श्रीलंका में हिंसा में अब तक तीन हजार लोग मारे गए हैं.
महत्वपूर्ण है कि शुक्रवार को राष्ट्रपति के भाई और रक्षा सचिव गोटाभाया राजपक्षे पर हुए आत्मघाती हमला हुआ था.
बीबीसी संवाददाता डमीथा लूथ्रा के अनुसार नए नियमों से वर्तमान आपातकाल क़ानूनों को और पुख़्ता बनाया गया है.
उनके अनुसार नए प्रावधान राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने मंत्रिमंडल के साथ कई बैठकों के बाद पेश किए.
नए प्रावधानों में संदिग्ध लोगों को गिरफ़्तार करने और हिरासत में रखने के साथ-साथ श्रीलंका में 'आतंकवाद' की स्पष्ट परिभाषा दी गई है.
इन प्रावधानों के बड़े ध्यान से बनाया गया है और एलटीटीई का नाम इनमें कहीं नहीं है.