मंगलवार, 05 दिसंबर, 2006 को 02:11 GMT तक के समाचार
वाणिज्य और उद्योग संगठन एसोचैम का आकलन है कि अग़र मौजूदा जीवनशैली और खान-पान में बदलाव नहीं हुआ तो अगले बीस वर्षों में भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या साढ़े पाँच करोड़ से अधिक हो जाएगी.
एसोचैम की अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक अभी भारत में लगभग ढ़ाई करोड़ लोग मधुमेह से पीड़ित हैं. यह संख्या वर्ष 1995 में सिर्फ़ एक करोड़ 90 लाख थी.
भारत की लगभग एक अरब आबादी में ग्रामीण इलाक़ों में रहने वाले तीन फ़ीसदी लोगों को यह बीमारी है.
शहरों में ऐसे रोगियों की संख्या काफ़ी अधिक है. कुल मधुमेह पीड़ितों में शहरी इलाक़ों का योगदान दस से 11 प्रतिशत है.
एसोचैम की हेल्थ कमेटी के चेयरमैन और सर गंगा राम अस्पताल के डॉ बीके राव ने मुताबिक दिल्ली के 11.6 प्रतिशत निवासियों को मधुमेह है और मुंबई में यह संख्या लगभग नौ प्रतिशत है.
सबसे अधिक हैदराबाद के 16.6 फ़ीसदी लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं.
विकसित देश
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 तक विकसित देशों में मधुमेह रोगियों की संख्या 41 फ़ीसदी बढ़ कर सात करोड़ से अधिक हो जाएगी.
विकासशील देशों में मधुमेह रोगियों की संख्या 170 फ़ीसदी बढ़ कर 22 करोड़ 80 लाख तक पहुँच सकती है.
एसोचैम ने चेतावनी दी है कि अग़र मधुमेह का उचित इलाज़ न कराने पर शरीर की रक्त धमनियाँ, ज़िगर, गुर्दे, आँख और तंत्रिका कोशिकाओं को भी नुकसान पहुँच सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में हो रही मौतों के लिए मधुमेह चौथा सबसे बड़ा कारण है.