सोमवार, 04 दिसंबर, 2006 को 13:16 GMT तक के समाचार
ज़ुबैर अहमद
बीबीसी संवाददाता, मुंबई
वर्ष 1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों के मामले में आतंकवाद निरोधक अदालत ने कुल 100 लोगों को दोषी ठहराया है.
अदालत ने इस मामले में सभी अभियुक्तों के ख़िलाफ़ ये फ़ैसला तो सुना दिया है कि कौन दोषी हैं और कौन निर्दोष.
उम्मीद है कि अगले साल के शुरू में दोषी लोगों को सज़ा सुनाई जाएगी. वर्ष 1993 में मुंबई में 12 बम धमाके हुए थे, जिनमें 257 लोग मारे गए थे.
इन धमाकों में 700 से ज़्यादा लोग घायल भी हुए थे. अदालत ने इस मामले में कुल 100 अभियुक्तों को दोषी ठहराया जबकि 23 लोगों को बरी कर दिया गया.
इन्हीं अभियुक्तों में बॉलीवुड स्टार संजय दत्त भी शामिल थे. पिछले दिनों अदालत ने उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत तो दोषी ठहराया लेकिन आतंकवाद के आरोपों से बरी कर दिया.
लंबा मुक़दमा
सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने बीबीसी को बताया कि अब इस मामले में सज़ा जनवरी से पहले नहीं सुनाई जा सकेगी.
उन्होंने कहा कि अब अभियोग पक्ष और बचाव पक्ष के वकील 11 दिसंबर से सज़ा पर अपना-अपना पक्ष रखेंगे और इस प्रक्रिया में डेढ़ महीने का समय लग सकता है.
उज्ज्वल निकम ने बताया, "भारत की न्यायिक व्यवस्था के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि एक मुक़दमे में 100 लोगों को दोषी ठहराया गया है."
इस मामले में 600 से ज़्यादा गवाहों ने सबूत दिए. माना जाता है कि 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद मुस्लिम अंडरवर्ल्ड के इशारे पर ये धमाके हुए थे.
माफ़िया सरगना दाउद इब्राहिम पर बम धमाकों की साज़िश रचने का आरोप है लेकिन वे अभी भी फ़रार हैं.
भारत सरकार कहती रही है कि दाउद इब्राहिम और एक अन्य संदिग्ध टाइगर मेमन पाकिस्तान में छिपे हुए हैं लेकिन पाकिस्तान इससे इनकार करता है.
मुंबई धमाकों के ज़्यादातर अभियुक्त पिछले 13 साल से जेल में हैं. यह मुक़दमा इतना लंबा चला कि 12 अभियुक्तों की मौत हो गई और कई अभियुक्तों ने उतनी सज़ा काट ली है, जितनी उन्हें आजीवन क़ैद मिलने के बाद भुगतनी पड़ती.