रविवार, 03 दिसंबर, 2006 को 21:04 GMT तक के समाचार
नादिया परवेज़
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री अर्जुन सिंह का कहना है कि देश का मौजूदा संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की इज़ाजत नहीं देता है.
उनका कहना है कि संविधान में आरक्षण सिर्फ़ सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े तबकों को ही दिए जाने की व्यवस्था है और सरकार इसी आधार पर मुसलमानों को आरक्षण देने पर विचार कर रही है.
बीबीसी के साथ विशेष बातचीत में अर्जुन सिंह ने कहा कि देश में मुसलमानों की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिए बहुत सारे क़दम उठाए जा रहे हैं लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है.
उन्होंने बताया कि मुसलमानों के हालात के सभी पहलुओं पर विचार करने के लिए मानव संसाधन राज्यमंत्री मोहम्मद अली अशरफ़ फ़ातमी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित कर दी गई है.
उन्होंने जानकारी दी कि यह समिति अगले साल जनवरी तक अपनी रिपोर्ट सौंप देगी. इस रिपोर्ट के आने के बाद सरकार आगे की कार्रवाई करेगी.
कौन है ज़िम्मेदार
अर्जुन सिंह का मानना है कि मुसलमानों की तरक्की के लिए पिछले 20 वर्षों में जो क़दम उठाए जाने चाहिए थे, वे नहीं उठाए गए.
वो कहते हैं,'' इसमें किस की ग़लती है और किसकी नहीं, ये तो एक राजनीतिक बहस है जो हमेशा चलती रहेगी. असल मामला यह है कि अब मौजूदा हालात को और ख़राब नहीं होने देना चाहिए.''
उन्होंने बताया कि अगली पंचवर्षीय योजना में उन इलाक़ों में प्राथमिक स्कूल खोलने की योजना है जहाँ दलितों और अल्पसंख्यकों की आबादी ज़्यादा है.
केंद्रीय मंत्री का कहना था कि पंचवर्षीय योजना में यह भी ध्यान रखा गया है कि मदरसों के बुनियादी स्वरूप को बरक़रार रखते हुए इनमें आधुनिक विषय जैसे विज्ञान और गणित भी शामिल किए जाएँ.
उनका कहना था कि इस सिलसिले में देश के मदरसों को संचालित करनेवाले लोगों से बातचीत की जा रही है.