रविवार, 03 दिसंबर, 2006 को 19:02 GMT तक के समाचार
अफ़ग़ानिस्तान में तैनात उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन यानी नैटो सेनाओं का कहना है कि उन्होंने लगभग 70 तालेबान लड़ाकों को संघर्ष में मार दिया है.
नैटो के एक प्रवक्ता का कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिण प्रांत हेलमंद में जब डेनमार्क की सेनाएँ गश्त पर थीं, उस दौरान उन पर हमला किया गया.
प्रवक्ता का कहना था कि इस संघर्ष में लड़ाकू हेलिकॉप्टरों की भी मदद ली गई.
नैटो अधिकारियों का कहना है कि चार घंटे तक चले संघर्ष में 70 से 80 तालेबान समर्थक मारे गए हैं.
अफ़ग़ानिस्तान से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि हताहतों की संख्या के बारे में स्वतंत्र सूत्रों से पुष्टि करना संभव नहीं है. लेकिन तालेबान का इस इलाक़े में अब भी सक्रिय रहना चिंता की बात है.
दूसरी ओर कंधार में एक सैनिक कारवाँ पर हुए एक आत्मघाती हमले में तीन अफ़ग़ानी नागरिक मारे गए और तीन ब्रितानी सैनिक घायल हो गए हैं. एक सप्ताह के अंदर नैटो सैनाओं पर यह चौथा आत्मघाती हमला है.
इसके पहले नैटो सैन्यबलों ने कहा था कि उनका अपने एक हेलिकॉप्टर से संपर्क टूट गया है. उधर तालेबान के एक प्रवक्ता ने दावा किया कि उन्होंने हेलिकॉप्टर को मार गिराया है.
हिंसा में बढ़ोत्तरी
पिछले कुछ महीनों में दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में तैनात नैटो सैनिकों को तालेबान लड़ाकों से कड़ी चुनौती मिल रही है और हिंसा में भी काफ़ी बढ़ोत्तरी हुई है.
इस वर्ष अलग अलग हिंसक घटनाओं में लगभग चार हज़ार लोग मारे जा चुके हैं.
हमलों में जिन देशों के सैनिक हताहत हुए हैं उनमें 90 फ़ीसदी सिर्फ़ चार देशों अमरीका, ब्रिटेन, कनाडा और नीदरलैंड के हैं.
जर्मनी, फ्रांस, स्पेन और इटली के सैनिक विद्रोहियों से लड़ने के बज़ाए सुरक्षा व्यवस्था और पुनर्निमाण कार्यों में लगे हुए हैं.
अफ़ग़ानिस्तान में सेना भेजने के बदले में इन देशों ने 'रेड कार्ड' प्राप्त किया था. इससे उन्हें विशेष अभियानों में अपने सैनिक भेजने या न भेजने की छूट मिली हुई है.
लेकिन हाल में अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इसकी आलोचना की थी और कहा था कि नैटो देशों को मुश्किल अभियानों पर भी जाना चाहिए.