शुक्रवार, 01 दिसंबर, 2006 को 22:56 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान सरकार का कहना है कि गुप्तचर एजेंसियों पर जिन 41 लोगों के लापता करने का आरोप लगाया जा रहा है, उनमें से वह 20 का पता लगा सकती है.
ग़ौरतलब है कि इन लापता लोगों के परिवारजनों का आरोप है कि गुप्तचर एजेंसियों ने उन्हें पकड़ रखा है.
सरकार ने पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इनमें से 10 लोग पहले ही घर वापस आ गए हैं.
अदालत ने सरकार को अन्य लापता लोगों के बारे में दो सप्ताह के भीतर जानकारी देने का निर्देश दिया है.
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिकार मोहम्मद चौधरी के नेतृत्ववाली खंडपीठ ने व्यवस्था दी कि यह सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह अपने लापता नागरिकों का पता लगाए और अदालत को सूचित करे.
निर्देश
जब सरकारी वकील ने सूचना दी कि 41 में से 20 लापता लोगों का पता लगाया जा सकता है तो मुख्य न्यायाधीश ने सरकार के प्रतिनिधि से कहा कि गुप्तचर एजेंसियों से समन्वय स्थापित करें और बाकी बचे 21 लोगों के बारे में भी जानकारी दें.
अदालत ने अगली सुनवाई 15 दिसंबर निर्धारित की है.
एक मानवाधिकार संस्था ने लापता लोगों की ओर से अदालत में याचिका दाखिल कर रखी है.
इस संस्था के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि 2001 में अमरीकी नेतृत्व के तहत जब से चरमपंथ के ख़िलाफ़ अभियान शुरू हुआ है तब से सैकड़ों लोगों को पकड़ा गया है.
इन लापता लोगों के कुछ रिश्तेदारों का कहना है कि कुछ लोग अल क़ायदा से कथित संबंधों के आधार पर पकड़े गए हैं.
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने सितंबर में पाकिस्तान पर शक के आधार पर कथित चरमपंथियों को बिना किसी क़ानूनी प्रक्रिया के हिरासत में रखने का आरोप लगाया था.
एमनेस्टी का कहना था कि इसमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं.पाकिस्तान सरकार ऐसी ख़बरों का खंडन करती आई है.