बुधवार, 29 नवंबर, 2006 को 04:39 GMT तक के समाचार
अपने निजी सचिव शशिनाथ झा की हत्या के मामले में दोषी पाए गए केंद्रीय कोयला मंत्री शिबू सोरेन ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दे दिया है.
लेकिन संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान इस मामले के सुर्खियों में आने से सत्ताधारी संयुक्त प्रगतिशील गंठबंधन सरकार और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं और विपक्ष ज़ोरदार हमले कर रहा है.
दिल्ली की एक अदालत ने शिबू सोरेन को मंगलवार को दोषी ठहराया और इस मामले में सज़ा 30 नवंबर को सुनाई जाएगी.
फ़ैसले के तुरत बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में ले लिया गया, लेकिन शिबू सोरेन ने सीने में दर्द की शिकायत की और उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स में भर्ती कराया गया.
इस्तीफ़ा और भावी रणनीति
झारखंड के उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ जेएमएम नेता सुधीर महतो ने बीबीसी संवाददाता नलिन कुमार को बताया कि शिबू सोरने ने मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दे दिया है और उनका इस्तीफ़ा स्वीकार भी कर लिया गया है.
उनका कहना था कि उनकी पार्टी बुधवार को दिल्ली में बैठक करेगी जिसमें पार्टी के चार सांसद भी शामिल होंगे और झारखंड मुक्ति मोर्चा इस बारे में अपनी अगली रणनीति पर विचार करेगा.
लेकिन झारखंड से स्थानीय भाजपा नेताओं के जेएमएम की ओर नरम होते रुख़ को दरकिनार करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि झारखंड की सरकार पर इस घटनाक्रम का कोई असर नहीं पड़ेगा.
'मंत्रिमंडल का अपराधिकरण'
लेकिन संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान घटे इस घटनाक्रम से राष्ट्रीय राजनीति गरमा गई है और विपक्ष के तेवर तीख़े हैं.
बीबीसी संवाददाता श्याम सुंदर से बातचीत में वरिष्ठ भाजपा नेता वीके मल्होत्रा ने आरोप लगाया, "अब तक राजनीति के अपराधिकरण की बात हो रही थी लेकिन ये तो मंत्रिमंडल का अपराधिकरण है. यदि ऐसे लोग मंत्रिमंडल में हैं जिनके ख़िलाफ़ आरोप पत्र दाख़िल हैं और यदि ये मंत्रि दाग़ी है, तो केवल वे नहीं प्रधानमंत्री भी दाग़ी हैं."
बीबीसी से बातचीत के दौरान वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा ने कहा, "ये सही है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की व्यक्तिगत छवि साफ़ है. लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी मुश्किल इस सवाल का जवाब देना है कि शिबू सोरेन इतने गंभीर आरोपों के बावजूद मंत्रिमंडल में कैसे बने रहे."