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सोरेन मामले पर संसद में भीषण हंगामा

भारतीय संसद के दोनो सदनों में झारखंड मुक्ति मोर्चा अध्यक्ष शिबू सोरेन के हत्या के एक मामले में दोषी पाए पर भारी हांगामा हुआ है जिसके कारण दो बार सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा.

दिल्ली की एक अदालत ने केंद्रीय कोयला मंत्री शिबू सोरेन को मंगलवार को दोषी ठहराया था जिसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया.

फ़ैसले के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में ले लिया गया, लेकिन शिबू सोरेन ने सीने में दर्द की शिकायत की. उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स में भर्ती कराया गया और जहाँ उनकी हालत स्थिर है.

लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान ही विपक्ष के सांसदों ने शोर करना शुरु कर दिया और मात्र आधे घंटे के बाद कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा.

इसके बाद जब दोनो पक्ष शिबू सोरेन मामले पर अपने विचार रख रहे थे तब सीपीआई नेता गुरुदास दासगुप्त की विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी पर की गई टिप्पणी से विपक्षी सांसद भड़क उठे और स्पीकर को कार्यवाही फिर स्थगित करनी पड़ी.

राज्यसभा में भाजपा नेता जसवंत सिंह ने कहा कि सीबीआई ने इस मामले में जाँच की थी तो क्या प्रधानमंत्री को इसका पता नहीं था.

जहाँ भाजपा सांसद माँग करते रहे कि प्रधानमंत्री इस मामले में जवाब दें वहीं सत्तापक्ष इसका विरोध करता रहा और दोनो तरफ़ से नारेबाज़ी हुई.

लोकसभा स्पीकर निराश

सुबह जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरु हुई वैसे ही भाजपा सांसदों ने शोर करना शुरु कर किया और फिर नारेबाज़ी भी की.

लोकसभा के स्पीकर सोमनाथ चटर्जी ने बार-बार विपक्ष से अपील की कि प्रश्नकाल को चलने दिया जाए और इस बारे में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की एक पत्र भी पढ़कर सुनाया.

उन्होंने आश्वासन दिया कि चाहे इस मामले में कोई नोटिस नहीं दिया गया लेकिन वे प्रश्नकाल के तत्काल बाद दोपहर में विपक्ष के नेता को बोलने का मौक़ा देंगे.

लेकिन उनकी एक न चली और सदन की कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित हुई.

इसके बाद जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरु हुई तो विभिन्न पक्षों ने अपने-अपने विचार रखने शुरु किए लेकिन बीच-बीच में हंगामा होता रहा.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता गुरुदास दासगुप्ता ने ज़ोर देकर कहा कि मंत्रियों की स्वच्छ और विश्वसनीय छवि ज़रूरी है लेकिन ये प्रधानमंत्री को तय करना है.

आडवाणी की भूमिका पर शोर

फिर गुरुदास दासगुप्ता ने विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी के सरकार में कार्यकाल और उन पर चले बाबरी मस्जिद विध्वंस मुकदमे की बात की.

आडवाणी का कहना था, "रामजन्मभूमि आंदोलन में शामिल होने का उनके मन पर कोई बोझ नहीं लेकिन अयोध्या में जो ढांचा ढह गया उसका उन्हें ज़रूर अफ़सोस है."

इस पर जब गुरुदास दासगुप्त फिर बोले तो उन्होंने इतिहास आडवाणी और रामजन्मभूमि आंदोलन को किस तरह याद करेगा, इस पर टिप्पणी की.

इसके बाद भाजपा सांसद उठ खड़े हुए और भीषण हंगामा करते हुए स्पीकर की कुर्सी की ओर बढ़े.

तत्काल ही स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को फिर स्थगित कर दिया.