मंगलवार, 28 नवंबर, 2006 को 20:34 GMT तक के समाचार
विनोद रिंगानिया
गुवाहाटी से
भारत के चमकते एक रुपए के सिक्के बांग्लादेश में कई कारखानों को चमका रहे हैं.
भारत से बड़े पैमाने पर अवैध रूप से बांग्लादेश जा रहे इन सिक्कों का इस्तेमाल वहाँ ब्लेड और कलम की निब बनाने के काम में होता है.
बांग्लादेश सीमा से सटे भारत के असम, मेघालय और पश्चिम बंगाल प्रांतों के सीमावर्ती ज़िलों से ये सिक्के दलालों की मदद से बांग्लादेश भेजे जाते हैं.
एक रुपए वाले भारतीय सिक्कों को ये दलाल बीस से चालीस फ़ीसदी ज़्यादा मूल्य पर खरीदते हैं.
किल्लत
बड़े पैमाने पर सिक्कों के बांग्लादेश चले जाने के कारण भारत के इन सीमावर्ती ज़िलों में एक रुपए के सिक्कों की किल्लत हो गई है.
असम का धुबड़ी, मेघालय का गारो पहाड़ और पश्चिम बंगाल के कूचबिहार, अलीपुरद्वार और जलापाईगुड़ी ज़िले इस किल्लत से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं.
बैंक अधिकारियों का कहना है कि एक रुपए के भारतीय सिक्के में पाए जाने वाले निकल धातु के कारण इनकी बांग्लादेश के कारखानों में भारी माँग है.
इस निकल धातु का इस्तेमाल ब्लेड और कलम की निब बनाने में होता है. बाज़ार में उपलब्ध निकल की कीमत से भारतीय सिक्कों से प्राप्त निकल सस्ती पड़ती है.
टॉफी और टोकन
धुबड़ी से काम करने वाले स्थानीय पत्रकार विजय शर्मा के अनुसार हर सप्ताह करीब दस लाख रूपए मूल्य के सिक्के अवैध रूप से भारत से बांग्लादेश चले जाते हैं.
ज़िले में करीब 150 एजेंट इसी काम में लगे हुए हैं. इस अवैध कारोबार के कारण सीमावर्ती भारतीय बाज़ारों में छोटे दुकानदारों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
धुबड़ी बाजार में आम ज़रूरत की चीजों की छोटी-सी दुकान चलाने वाले राजापाल अपने ग्राहकों को अब एक रुपए के सिक्के की जगह टॉफी और च्विंग-गम जैसी चीज पकड़ा देते हैं.
यह इस शहर के लिए अब आम बात हो गई है. धानपट्टी मुहल्ले में चाय दुकान चलाने वाले मुरारी शर्मा ने तो टिन के छोटे-छोटे टोकन बना डाले हैं जिनका इस्तेमाल वे सरकारी मुद्रा ही जगह करते हैं.
स्टील के सिक्के
निचले असम में मुद्रा की आपूर्ति धुबड़ी स्थित भारतीय स्टेट बैंक के स्थानीय मुख्यालय या यूनाइटेड कॉमर्शियल बैंक की स्थानीय शाखा के मार्फ़त ही होती है.
यूको बैंक के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक अब्दुल मजीद बताते हैं कि उनके पास एक रुपए के सिर्फ छह हज़ार सिक्कों का स्टॉक बचा है जबकि पाँच रुपए के सिक्के पर्याप्त मात्रा में हैं.
हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक से एक, दो और पाँच रुपए के पाँच-पाँच लाख रुपयों की खेप जल्दी ही आने वाली है, लेकिन सिक्कों के तस्करों के हाथों से यह मुद्रा कब तक बच पाएगी कहना मुश्किल है.
भारतीय स्टेट बैंक के धुबड़ी स्थित मुख्य महाप्रबंधक बी चटर्जी बताते हैं कि उन्होंने रिजर्व बैंक से एक, दो और पाँच रुपए वाली तीन करोड़ मूल्य की मुद्राएँ भेजने का आग्रह किया है जिनके पहुँचने के बाद मुद्रा का कृत्रिम अभाव काफी हद तक दूर हो जाएगा.
गुवाहाटी में भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारियों का कहना है कि अब नए ढाले जाने वाले एक रुपए के सिक्के स्टील के होंगे और उनमें निकल बिल्कुल नहीं होगा.
ऐसे सिक्के बाजार में चलन में आ चुके हैं लेकिन अभी पुराने सिक्के भी उपलब्ध हैं.
अधिकारियों का कहना है कि नए सिक्के पूरी तरह चलन में आने और पुराने सिक्कों के हट जाने पर सिक्कों की तस्करी की समस्या स्वयं ही खत्म हो जाएगी.