मंगलवार, 28 नवंबर, 2006 को 17:25 GMT तक के समाचार
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने अफ़ग़ानिस्तान के ख़तरनाक इलाक़ों में सेना भेजने से परहेज करने पर नैटो के सदस्य देशों को फटकार लगाई है.
लातविया में उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन यानी नैटो की बैठक शुरू होने से पहले बुश ने इस बात पर बल दिया कि अफ़ग़ानिस्तान में तैनात अंतरराष्ट्रीय सेना को ज़रूरी संसाधन मुहैया कराया जाना चाहिए.
नैटो के कई सदस्य देशों ने इस तरह के प्रावधान बना रखे हैं जिनके तहत वे अपनी सेना को अफ़ग़ानिस्तान के ख़तरनाक इलाक़ों में नहीं भेजते हैं.
ये ऐसे इलाक़े हैं जहाँ तालेबान लड़ाके अपनी ताकत बढ़ाने में लगे हुए हैं.
नैटो की दो दिवसीय बैठक में अफ़ग़ानिस्तान का मुद्दा छाए रहने की संभावना है.
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने ही पाँच साल पहले अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान की सत्ता ख़त्म करने के अभियान की अगुआई की थी.
बुश ने नैटो के पूर्व प्रमुख सैप डी हूप शेफ़र के उस बयान को दोहराया जिसमें उन्होंने कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान अभियान को सफल बनाना संभव है.
ख़तरे
पिछले कुछ महीनों में दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में तैनात नैटो सैनिकों को तालेबान लड़ाकों से कड़ी चुनौती मिल रही है.
इस वर्ष अलग अलग हिंसक घटनाओं में लगभग चार हज़ार लोग मारे जा चुके हैं.
नैटो पर हुए हमलों में जिन देशों के सैनिक हताहत हुए हैं उनमें 90 फ़ीसदी सिर्फ़ चार देशों अमरीका, ब्रिटेन, कनाडा और नीदरलैंड के हैं.
जर्मनी, फ्रांस, स्पेन और इटली के सैनिक विद्रोहियों से लड़ने के बज़ाए सुरक्षा व्यवस्था और पुनर्निमाण कार्यों में लगे हुए हैं.
अफ़ग़ानिस्तान में सेना भेजने के बदले में इन देशों ने 'रेड कार्ड' प्राप्त किया था. इससे उन्हें विशेष अभियानों में अपने सैनिक भेजने या न भेजने की छूट मिली हुई है.