सोमवार, 27 नवंबर, 2006 को 16:03 GMT तक के समाचार
झारखंड में जिन तीन शहरों में सर्वेक्षण किया गया वे हैं: देवघर, गिरीडीह और रामगढ़. यहाँ किसानों, व्यवसायियों, पुलिस अधिकारियों, मीडिया कर्मियों आदि अनेक लोगों से उनकी चिंताओं के विषय में बात की गई.
इन तीन शहरों में लोगों ने जिन बड़ी समस्याओं पर अपनी चिंता जताई, वे हैं अपराध, क़ानून-व्यवस्था, बेरोज़गारी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, बिजली और पानी.
देवघर
पेय-जल की कमी यहाँ एक बड़ी समस्य़ा है. जिस रफ़्तार से यहाँ आबादी बढ़ी है उस अनुपात में यहाँ जल-आपूर्ति नहीं हो पाई है.
नतीजतन कुएँ एक के बाद एक सूखते जा रहे हैं. कृषि और उद्योग के लिए भी पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहा. अपराध और अपहरण की घटनाएं आम हैं, अत: लोग असुरक्षित महसूस करते हैं.
लोगों की चिंता का एक बड़ा कारण भ्रष्टाचार भी है. उनका मानना है कि भ्रष्टाचार पूरे प्रशासन में हर स्तर पर फैला हुआ है.
देवघर आने वाले तीर्थ-यात्री भी अपने साथ स्वास्थ्य से जुड़ी अनेक समस्याएं लेकर आते हैं. इनमें सीवेज और ड्रेनेज की समस्य़ाएं शामिल हैं, जिनके कारण बीमारियां फैलती हैं.
लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में आने वाले तीर्थ-यात्रियों के ठहरने की न तो उचित व्यवस्था है और न अस्पताल और न उनमें ज़रूरी उपकरण उपलब्ध हैं.
हालांकि परंपरागत उच्च शिक्षा की दृष्टि से यह शहर मशहूर है, लेकिन यहाँ स्कूल और कॉलेजों की कमी है. इस कारण यहाँ के विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए रांची अथवा पटना जाना पड़ता है.
गिरीडीह
शहर के उतरोत्तर सिकुड़ते औद्योगिक आधार के कारण सामाजिक और आर्थिक समस्याएं जन्म ले रही हैं.
समृद्ध अबरक उद्योग बंद हो चुका है और कोयला खदानों से अधिकारिय़ों की मिलीभगत से चोरी जारी है. लोगों को शिकायत है कि सरकार के पास कोई रणनीति नहीं है, जिसके तहत यहाँ उद्योग-धंधे लगाए जा सकें.
वे चाहते हैं कि सरकार इसके लिए न सिर्फ़ बिजली और टेकनॉलॉजी मुहैया कराए, बल्कि उचित का़यदे-क़ानून बनाए और प्रशासनिक इकाइयों का गठन भी करे.
बेरोज़गारी से गिरीडीह में अपराध भी पनप रहा है. यहाँ आए दिन होने वाली नृशंस हत्याओं और डकैतियों के चलते लोग रात में अपने घरों से निकलने में घबराते हैं.
उनका मानना है कि इन घटनाओं के पीछे बेरोज़गार युवाओं का हाथ है.
लोगों के मन में यह बात घर कर चुकी है कि अपराधियों को सज़ा इसलिए नहीं मिल पाती कि उन्हें राजनेताओं और अधिकारियों से शह मिलती है.
लोगों का यह भी मानना है कि सत्ता में बैठे लोगों का शिक्षा के आधुनीकिकरण में कोई दिलचस्पी नहीं है. इस कारण यहाँ स्कूली ईमारतों और अध्यापकों की कमी होती जा रही है.
रामगढ़
हत्या के कई मशहूर हस्तियों से जुड़े मामले अभी तक अनसुलझे पड़े हैं. इसका कारण भी लोग अफ़सरों को दी जाने वाली घूस बताते हैं.
रामगढ़ के ज़्यादतर लोगों का मानना है कि समस्या के मूल में शिक्षा का घटिया स्तर और विद्यार्थियों के अनुपात में अध्यापकों की कम संख्या है.
उनकी शिकायत थी कि पढ़ाई के स्तर पर नियंत्रण की कोई व्यवस्था नहीं है और अध्यापक इंस्पेक्टरों को रिश्वत देते हैं.
वे चाहते हैं कि ग्रामवासी स्वयं अध्यापकों का मूल्यांकन करें. सरकार द्वारा शिक्षा और बेरोज़गारी की समस्या हल करने की कोशिशों को वे 'अस्थाई' और 'अपर्याप्त' मानते हैं.
ऐसी भी शिकायतें थीं कि निर्वाचित होने के बाद अधिकारी विकास राशि को 'हड़प' कर जाते हैं, जिसका क़ानून-व्यवस्था पर विपरीत असर पड़ता है.
लोगों का चूंकि एक शहर से दूसरे शहर में आना-जाना लगा रहता है, अत: एच आई वी/एड्स लोगों की चिंता का विषय बना हुआ है.
ये लोग इस बात से भी चिंतित थे कि उद्योगों ने शहर का पर्यावरण बिगाड़ दिया है. इसके कारण यहाँ बीमारियां बढ़ी हैं, जबकि बढ़ती आबादी के मुताबिक़ स्वास्थ्य सेवाओं में वृद्धि नहीं हुई है.
रामगढ़ का बाहरी दुनिया से संपर्क एक और अहम मसला है. भले ही बिजली और पानी की आपूर्ति की स्थिति सुधारने की दिशा में काम जारी है, परंतु लोगों को लगता है कि सड़कों की मरम्त के लिए निर्धारित राशि का उचित इस्तेमाल नहीं किया जा रहा.
इन सभी विषयों पर तो बीबीसी हिन्दी के कार्यक्रमों में चर्चा होगी ही, परंतु आपकी दुनिया, आपकी आवाज़ रोड शो में जो विषय चर्चा के केंद्र में रहेंगे, वे हैं :
रामगढ़ 4/12 रामगढ़ की प्रशासनिक स्थिति
गिरीडीह 7/12 ठप्प हो रहे उद्योग और बेरोज़गारी
देवघर 10/12 पानी की कमी