सोमवार, 27 नवंबर, 2006 को 15:54 GMT तक के समाचार
आशुतोष चतुर्वेदी
बीबीसी संवाददाता, रेणुकूट से लौटकर
भारत के बिजली उत्पादन की राजधानी माने जानेवाले उत्तर प्रदेश के सोनभद्र ज़िले के रेणुकूट में बिजली की भारी कमी है.
रेणुकूट उत्तरी ग्रिड की जान माना जाता है और यहाँ की किसी भी इकाई पर संकट आता है तो पूरी ग्रिड ही गड़बड़ा जाती है.
यहाँ ऐसे गाँवों की बड़ी संख्या है जहाँ बिजली की रोशनी नहीं पहुँची है और जिन गाँवों में बिजली आती भी है तो भी वह कुछ ही घंटों के लिए.
जबकि आसपास की औद्योगिक इकाइयाँ इस बिजली से जगमगाती रहती हैं.
यहाँ रिहंद बाँध और नेशनल थर्मल पावर कोर्पोरेशन की तीन इकाइयों से लगभग 2300 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है.
देश की सबसे पुराने बिजली परियोजनाओं में एक रिहंद पनबिजली योजना से लगभग 300 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है.
रेणुकूट के उपजनसूचना अधिकारी शैलेश सिंह ने जानकारी दी कि सोनभद्र ज़िले में विभिन्न इकाइयों से लगभग 10500 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है और जैसीकि व्यवस्था है, यह बिजली उत्तरी ग्रिड में डाल दी जाती है.
लोगों की पीड़ा
स्थानीय पत्रकार अभय भार्गव बताते हैं कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के प्रयासों से रिहंद बिजली परियोजना की नींव पड़ी थी. लेकिन उसका लाभ स्थानीय निवासियों को नहीं मिल पाया.
रेणुकूट के मढैया गाँव के नवयुवक संजय एक कारखाने में मजदूरी करते हैं, वो इस बात को लेकर बेहद खफ़ा हैं.
उनका कहना है कि रिहंद बाँध बन गया लेकिन उनके गाँव को न तो पानी उपलब्ध है और न ही बिजली.
रेणुकूट के कुलडुमरी गाँव के प्रधान रामकेवल यादव का कहना है कि जब रिहंद बाँध बना था तो 363 गाँव डूब गए थे लेकिन उन्हें पर्याप्त मुआवज़ा कभी नहीं मिला.
उनका कहना था कि अब स्थिति यह है कि जो स्थान देश के विभिन्न हिस्सों में बिजली की आपूर्ति करता है, उसी के बैरपान, सिधवाडाड और पिपरी जैसे आसपास के गाँवों में आज तक बिजली नहीं पहुँची है.
वो कहते हैं कि अनपरा तापीय परियोजना के लिए लोगों को विस्थापित किया गया और डिबुलगंज गाँव में बसाया गया लेकिन लोगों को वहाँ पानी उपलब्ध नहीं है और उन्हें कोई काम नहीं दिया जा रहा.
उनका कहना था कि यह तो दीपक तले अँधेरा है लेकिन सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है.
रेणुकूट के टेलिफ़ोन विभाग के एक अधिकारी डीके उपाध्याय का कहना है कि नेहरूजी जब यहाँ आए थे तो उन्होंने कहा था कि यह स्थान भारत का स्विट्जरलैंड बनेगा लेकिन यह सपना पूरा नहीं हो पाया.