सोमवार, 27 नवंबर, 2006 को 07:21 GMT तक के समाचार
भारत में पहली बार वैज्ञानिक दो अलग-अलग जगहों से ज़मीन से ज़मीन तक मार करने वाली पृथ्वी मिसाइलों की आपस में टक्कर करवाने में सफल रहे हैं.
ये परीक्षण उड़ीसा के पास किया गया.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक उड़ीसा के पास चांदीपुर के एकीकृत परीक्षण रेंज यानी आईटीआर से पहली पृथ्वी-2 मिसाइल को दागा गया.
इसके एक मिनट बाद बंगाल की खाड़ी से पास व्हीलर द्वीप से दूसरी मिसाइल दागी गई ताकि वो पहली पृथ्वी मिसाइल से टकरा सके. दोनों जगहों के बीच 72 किलोमीटर का फ़ासला है.
सूत्रों के मुताबिक दोनों पृथ्वी मिसाइलें बंगाल की खाड़ी के पास टकराईं.
भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रवक्ता ने इस परीक्षण को 'सफल' बताया है.
ये परीक्षण पहले रविवार को होना था पर बाद में इसे सोमवार तक के लिए टाल दिया गया था.
पीटीआई के मुताबिक ऐतिहायती क़दमों के तहत आईटीआर परिसर के दो किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को अस्थाई तौर पर हटा दिया गया था.
उन्नीस नवंबर को पृथ्वी-2 का आख़िरी बार परीक्षण किया गया था. इसकी मारक क्षमता 250 किलोमीटर है और ये परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है.
भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 'एकीकृत लक्षित मिसाइल विकास योजना' के तहत पाँच मिसाइलें विकसित की हैं जिनमें पृथ्वी भी एक है.
पृथ्वी मिसाइल के तीन प्रकार हैं और ये थल सेना, नौसेना और वायु सेना के लिए अलग-अलग तैयार की गईं हैं.
इसका पहला परीक्षण 22 फरवरी, 1988 को आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र से किया गया था और तब से इसके कई सफल परीक्षण किए जा चुके हैं.