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मालेगाँव धमाके: गुत्थी सुलझाने का दावा

महाराष्ट्र के मालेगाँव में हुए बम धमाकों के मामले में आठ लोगों को गिरफ़्तार करने के साथ ही पुलिस ने इस मामले की गुत्थी सुलझा लेने का दावा किया है.

पुलिस का कहना है कि ये सभी प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट यानी सिमी के सदस्य हैं और मालेगाँव में हुए बम धमाकों में इनका हाथ था.

ग़ौरतलब है कि सितंबर में मालेगाँव में एक मस्जिद के पास हुए तीन धमाकों में 37 लोग मारे गए थे और 125 से भी अधिक घायल हुए थे.

महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक पीएस पसरीचा ने सोमवार को पत्रकारों से कहा कि पुलिस ने अब इस घटना की गुत्थी सुलझा ली है.

उन्होंने कहा कि घटना को अंजाम देने वालों का मक़सद सांप्रदायिक तनाव फैलाना था. पसरीचा ने बताया कि इस मामले में दस और लोगों की पुलिस को तलाश है जिनमें दो विदेशी नागरिक हैं.

महाराष्ट्र में आतंकवाद निरोधक दस्ते के प्रमुख केपी रघुवंशी ने बीबीसी को बताया कि गिरफ़्तार किए गए लोगों में से दो को प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान भेजा गया था.

सबूत

केपी रघुवंशी ने कहा कि पुलिस के पास इस मामले में पुख़्ता सबूत हैं जिसमें अभियुक्तों के इक़बालिया बयान, फ़ॉरेंसिक रिपोर्ट, ब्रेन मैपिंग जैसे वैज्ञानिक सबूत, लाई डिटेक्टर टेस्ट की रिपोर्ट और एक प्रत्यक्षदर्शी का बयान शामिल है.

मालेगाँव धमाकों से महज दो माह पहले जुलाई में मुंबई की लोकल ट्रेनों में सिलसिलेवार धमाके हुए थे जिनमें कम से कम 186 लोगों की जानें गई थीं.

मुंबई पुलिस का आरोप है कि इन धमाकों के पीछे पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई और चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का हाथ था.

हालाँकि पाकिस्तान की सरकार और लश्कर ने इन आरोपों का खंडन किया है.