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रविवार, 26 नवंबर, 2006 को 10:25 GMT तक के समाचार

संजीव श्रीवास्तव
भारत संपादक, बीबीसी हिंदी

एक मुलाक़ात: लालकृष्ण आडवाणी से

बीबीसी हिंदी सेवा भारत के जाने-माने लोगों की ज़िंदगी के अनछुए पहलुओं को श्रोताओं तक पहुंचाने के लिए उनसे अंतरंग मुलाक़ात का ख़ास कार्यक्रम - 'एक मुलाक़ात' - शुरू कर रहा है.

इसी श्रंखला में मैने भारतीय राजनीति के सबसे अधिक विवादास्पद लोगों में से एक लाल कृष्ण आडवाणी से मुलाकात की और उनके निजी और सार्वजनिक जीवन के अनछुए पहलुओं पर उनसे बातचीत की.

लालकृष्ण आडवाणी के साथ एक मुलाक़ात

अभी दो साल पहले ही एक अरब से भी ज़्यादा जनसंख्या वाले इस देश में आडवाणी सबसे शक्तिशाली आदमी माने जाते थे. ये राजनीतिक ताकत तो लाकृष्ण आडवाणी के व्यक्तित्व का एक पहलू है.

आडवाणी के साथ मुलाक़ात- विस्तार से पढ़ें

आडवाणी में 79 साल की उम्र में जो जोशोज़ुनून देखने को मिलता है वैसा उनके हमउम्र किसी और भारतीय राजनीतिक नेता में शायद ही देखने को मिले. अपने विरोधियों और समर्थकों से उन्हें बराबर का सम्मान मिलता है.

उत्तर भारत के धार्मिक स्थल अयोध्या में हिंदू मंदिर बनाने के लिए अलगाववादी आंदोलन करने वाले आडवाणी को उनके आलोचक आक्रामक हिंदू राष्ट्रवाद का प्रतीक मानते हैं.

ग़ैर-राजनीतिक पहलुओं पर बात

लेकिन अपने समर्थकों की नज़रों में आडवाणी भारतीय राजनीति के 'लौहपुरुष' हैं जिन्होंने हिंदू राष्ट्रवाद को एक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया और जिससे भारतीय जनता पार्टी केंद्र में सरकार बना सकी.

(लालकृष्ण आडवाणी के साथ 'एक मुलाक़ात' सुनिए बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के अलावा, बीबीसी हिंदी – मीडियम वेव 212 मीटर बैंड पर और शॉर्टवेव 19, 25, 41 और 49 मीटर बैंड पर हर रविवार - भारतीय समयानुसार रात आठ बजे. दिल्ली और मुंबई में वन एफ़एम 94.3 पर भारतीय समयानुसार दोपहर 12 बजे भी इसे सुन सकते हैं)

आडवाणी से मेरी मुलाकात पूरी तरह से ग़ैर राजनैतिक मुद्दों पर केंद्रित रही. इस बातचीत में मैंने आडवाणी से फ़िल्म, किताबों और संगीत में उनकी रुचि जैसे विषयों पर बातचीत की.

लाल कृष्ण आडवाणी से मिलना हमेशा रुचिकर होता है क्योंकि उनका पूरा व्यक्तित्व बड़ा रहस्यमय है.

आडवाणी कभी भी खुलते नहीं हैं और अपने को जानने समझने का मौका नहीं देते......

पिछले साल अपनी पाकिस्तान यात्रा के बाद तो वो मीडिया से बचकर ही रहते हैं.

इस यात्रा में आडवाणी ने पाकिस्तान के संस्थापक ज़िन्ना की काफ़ी तारीफ़ कर दी थी जिसकी वज़ह से उनकी ही पार्टी के हिंदू कट्टरपंथियों ने उनकी बहुत आलोचना की थी और उन्हें पार्टी अध्यक्ष का पद गंवाना पड़ा था.

लेकिन कभी-कभी उकसाये जाने पर आडवाणी अपने को आपके सामने खोल कर रख देते हैं और ये जानने की पूरी छूट देते हैं कि असल मायने में उनके अंदर क्या चल रहा है.

आडवाणी ने कमेंटेटर की नकल की

मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई जब आडवाणी ने मुझे उनकी जिंदगी के 'दूसरे पहलू' के बारे में जानने में पूरा सहयोग करने की बात कही और एक बच्चे की तरह बातचीत का पूरा आनंद लिया.

जब बीबीसी ने करांची में उनके स्कूल के दिनों के बारे में पूछा तो आडवाणी ने न सिर्फ़ ये बताया कि वो क्रिकेट के कितने बड़े प्रशंसक थे और किसी महत्वपूर्ण मैच के लिए कैसे स्कूल से भाग जाते थे बल्कि उन्होंने उस ज़माने के एक महान क्रिकेट कमेंटेटर की ख़ुद नकल करके भी दिखाई.

मैं यहाँ कह सकता हूँ कि आडवाणी एक अच्छे क्रिकेट कमेंटेटर होते अगर उन्होंने ख़ुद दूसरे श्रोताओं के सामने बोलने का फैसला न लिया होता.

आडवानी ने बताया कि वो सचिन तेंदुलकर के बहुत बड़े प्रशंसक हैं.

'अमिताभ की बराबरी नहीं'

बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, "अगर कोई क्रिकेट की बात करे तो सचिन का नाम सहज ही सामने आता है. सचिन और हमारे कप्तान राहुल द्रविड़ की बात ही निराली है."

आडवाणी ने बॉलीवुड के लिए अपने प्यार के बारे में भी हमसे ख़ुलासा किया.

बॉलीवुड के इस दौर के कलाकारों के बारे में बातचीत करते हुए आडवाणी ने रानी मुखर्जी और ऋतिक रोशन की तारीफ़ की लेकिन उन्होंने बॉलीवुड के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन को अपना अब तक का सबसे चहेता अभिनेता बताया.

उनका कहना था, "फ़िल्म इंडस्ट्री में और भी अच्छे कलाकार हैं लेकिन इतने लंबे समय तक टॉप पर बने रहना किसी और के बस की बात है क्या? मुझे ऐसा कोई दूसरा नहीं दिखाई देता जो अमिताभ के बराबर खड़ा हो सके. इसमें कोई संशय नहीं कि अमिताभ अपने आप में एक आयाम हैं."

हॉलीवुड की फ़िल्में में भी आडवानी उतनी ही रुचि से देखते हैं जितनी बॉलीवुड की. आडवाणी सस्पेंस थ्रिलर फ़िल्मों के प्रशंसक हैं. आडवाणी ने बताया कि उन्होंने अल्फ्रेड हिचकॉक की सभी पिक्चरें देखी हैं.

आडवाणी 1957 में बंबई में अपने अंकल के साथ देखी फ़िल्म का ज़िक्र करते हैं,"मैंने अख़बार में एक समाचार पढ़ा कि मुंबई के स्ट्रैंड सिनेमा में हाउस ऑफ़ वैक्स फ़िल्म देखकर एक आदमी को दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई. तब मैंने निश्चय किया कि मुझे ये 3-डी फ़िल्म देखनी है."

'कोई मलाल नहीं'

आडवाणी की किताबों में भी काफ़ी रुचि है. उनका कहना था, "मै जब स्कूल में ही पढ़ रहा था तो मेरे अध्यापक ने मुझे डेल कार्निगी की किताब – हाउ टू विन फ्रेंड्स एंड इंफ्लूएंस पीपल पढ़ने को दी. इसने मुझे सिखाया कि एक अच्छा श्रोता कैसे बना जाए."

हाल ही में पढ़ी जर्मन मनोवैज्ञानिक डॉ ब्रायन विस की किताबों से आडवाणी ख़ासे प्रभावित दिखे, जो पुनर्जन्म के विषय पर लिखते हैं. वे बोले, "उनकी किताबें सेम सोल, डिफरेंट बॉडीज़, मेनी लाइव्स, मेनी मास्टर्स और ऑन्ली लव इज़ रिअल काफ़ी प्रभावित करने वाली हैं."

79 साल की उम्र में भी इतना व्यस्त राजनैतिक जीवन होते हुए भी आडवाणी ख़ासे चुस्त-दुरुस्त दिखाई देते हैं.

“बहुत से लोग पूछते हैं कि मैं इतना फिट कैसे हूँ. इसका राज़ ये है कि मैं बचपन से ही कम खाना खाता हूँ.”

आडवाणी की ये तंदरुस्त होने की बातें उन लोग के लिए चेतावनी है जो उन्हें ख़त्म हो गया लिखते हैं.........आडवाणी, "भारत के सभी राजनैतिक दल युवा पीढ़ी को बढ़ावा देने की बात करते हैं लेकिन बूढ़े लोगों के रिटायर होने की बात कोई नहीं करता."

जब हमने उनसे ये पूछा कि क्या उन्हें अपने जीवन में किसी बात का मलाल है तो आडवाणी का ज़वाब था, "ये मेरे स्वभाव में ही नहीं है कि बीती बात का मलाल करूं. चाहे परिणाम संतोषजनक न रहे हों तो भी मैं ये सोचकर दुखी नहीं होता कि अतीत में क्या हुआ. हमें आगे की ओर देखना चाहिए."