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शनिवार, 25 नवंबर, 2006 को 14:51 GMT तक के समाचार

भारत के अहम दौरे पर पहुँचे राजपक्षे

श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे पाँच दिनों की भारत यात्रा पर राजधानी नई दिल्ली पहुँच गए हैं. राष्ट्रपति राजपक्षे के इस दौरे को इसलिए भी काफ़ी अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में श्रीलंका में हिंसा की घटनाएँ बढ़ी हैं.

भारत ने भी श्रीलंका की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त की है. उम्मीद है कि भारतीय नेताओं और राष्ट्रपति राजपक्षे के साथ मुलाक़ात में एलटीटीई के नियंत्रण वाले इलाक़े की स्थिति के साथ-साथ शांति समझौते पर भी चर्चा होगी.

वैसे मंगलवार से पहले राष्ट्रपति राजपक्षे की भारतीय नेताओं से बातचीत संभव नहीं दिखती. क्योंकि राष्ट्रपति राजपक्षे पहले देहरादून जा रहे हैं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से वे बुधवार को मिलेंगे.

एक साल पहले राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद महिंदा राजपक्षे की ये दूसरी भारत यात्रा है. शुक्रवार को ही भारत के विदेश सचिव शिवशंकर मेनन श्रीलंका के दौरे से लौटे हैं.

भारत की चिंता

विदेश सचिव शिवशंकर मेनन श्रीलंका को भारत की चिंता से अवगत कराने के लिए कोलंबो गए थे. भारत को ख़ास तौर पर जाफ़ना प्रायद्वीप की स्थिति पर चिंता है जहाँ पाँच लाख लोगों तक खाना भी नहीं पहुँच पा रहा.

हाल ही में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के करुणानिधि को आश्वस्त किया था कि वे राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को भारत की चिंता से अवगत करा देंगे.

करुणानिधि की पार्टी डीएमके केंद्र के सत्ताधारी गठबंधन में शामिल है. तमिलनाडु के क़रीब छह करोड़ लोग श्रीलंका के तमिल अल्पसंख्यकों से सांस्कृतिक और धार्मिक आधार पर गहराई से जुड़े हुए हैं.

तमिलनाडु की कई छोटी पार्टियों ने तो राजपक्षे की भारत यात्रा के विरोध में रविवार को विरोध प्रदर्शनों की योजना बनाई है.

भारत ने शनिवार को ही श्रीलंका सरकार और एलटीटीई से वर्ष 2002 के संघर्ष विराम समझौते का पालन करने को कहा था और बातचीत की सलाह भी दी थी.

उम्मीद है कि राष्ट्रपति राजपक्षे से बातचीत में भारतीय नेता इसके लिए ज़ोर डालेंगे. दूसरी ओर राष्ट्रपति राजपक्षे का कहना है कि वे दोनों देशों के मछुआरों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक गश्त बढ़ाने के मुद्दे पर भारत से सहयोग मांगेंगे.

बातचीत में भारत से श्रीलंका को बिजली की आपूर्ति का मुद्दा भी उठेगा.