अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित कश्मीर में शनिवार को हड़ताल के कारण सामान्य जनजीवन ख़ासा प्रभावित हुआ है. उधर हिंसा की कुछ ताज़ा घटनाओं में नौ लोगों की मौत हो गई है.
मारे गए लोगों में आठ सैनिक हैं. पिछले कुछ महीनों में यह पहली मुठभेड़ है जिसमें इतनी संख्या में सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं.
हड़ताल की घोषणा सरकार की उस योजना के विरोध में की गई है जिसके तहत राज्य से बाहर के लोगों को राज्य में ज़मीन पट्टे पर दिए जाने पर विचार किया जा रहा है.
हड़ताल की घोषणा सैयद अली शाह गीलानी के नेतृत्व में अलगाववादी संगठनों के गठबंधन की ओऱ से की गई है.
हड़ताल के कारण घाटी में कई जगहों पर दुकानें बंद हैं और परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हुई है.
इस मामले को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब राज्य सरकार ने घोषणा की कि वो गुलमर्ग के रिजॉर्ट के पास की 69 एकड़ ज़मीन को नीलाम करने का विचार कर रही है.
यह नीलामी यहाँ पर होटलों के निर्माण के लिए की जानी थी. हालांकि राज्य के पर्यटन मंत्री आश्वासन दे चुके हैं कि राज्य कैबिनेट इस मुद्दे पर फिर से विचार करेगा और फ़िलहाल इस योजना को टाल दिया गया है.
इस योजना का विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि वो इस योजना का विरोध जारी रखेंगे जबतक सरकार इसे वापस लेने की घोषणा नहीं कर देती है.
देश का क़ानून अन्य राज्यों के लोगों को यहाँ ज़मीन ख़रीदने की स्वीकृति नहीं देता है. हालाँकि सरकार बाहरी लोगों को औद्योगिक इकाइयाँ चलाने के लिए पट्टे पर ज़मीन दे सकती है.
हिंसा की घटना
उधर शनिवार को भारत प्रशासित कश्मीर के दक्षिणी क़स्बे शोपियान में चरमपंथियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई मुठभेड़ में आठ सैनिकों समेत नौ लोगों की मौत हो गई है.
सेना के प्रवक्ता कर्नल एके माथुर ने बताया कि मरने वालों में एक चरमपंथी हैं. उन्होंने बताया कि यह मुठभेड़ निलडोरा गाँव के पास शनिवार सुबह हुई.
वहीं राज्य के बारामूला ज़िले में क़रीब 18 चरमपंथियों ने सेना के सामने समर्पण कर दिया है.
इस बारे में जानकारी देते हुए सेना प्रवक्ता ने बताया कि ये लोग पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से लौटे हैं और अब एक शांतिपूर्ण ज़िंदगी बिताना चाहते हैं.
सेना प्रवक्ता ने बताया कि इन लोगों को इनके परिजनों को सौंप दिया गया है.