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शुक्रवार, 24 नवंबर, 2006 को 14:17 GMT तक के समाचार

अनीश अहलूवालिया
बीबीसी संवाददाता

अरुणाचल मुद्दे पर संसद में बहस

अरुणाचल प्रदेश के विषय में चीन के राजदूत के बयान से उठे विवाद पर शुक्रवार को संसद में ख़ासी गहमागहमी से बहस हुई.

चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओं की यात्रा से पहले चीन के राजदूत ने कहा था कि पूरे अरूणाचल प्रदेश पर चीन दावा करता है.

हालाँकि विदेशमंत्री प्रणव मुखर्जी उस दावे को ख़ारिज करते हुए कह चुके हैं कि अरूणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है. लेकिन लोकसभा में विपक्ष ने मांग रखी थी कि यही बात संसद में एक प्रस्ताव के ज़रिए पारित की जाए.

विपक्ष पहले ही कह चुका था कि वो अफ़ज़ल गुरू की फांसी, सच्चर समिति की रिपोर्ट और अरुणाचल प्रदेश के विषय में चीन के राजदूत की टिप्पणी पर सरकार को घेरेगा.

इसी रणनीति के तहत शुक्रवार को उसने सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा बांधा. लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन के साथ विवाद पर सरकार के सामने दो सवाल रखे.

मांग

उन्होंने मांग की संसद एक प्रस्ताव लाकर यह कहे कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है.
विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि चीन में भारतीय राजदूत ने वहाँ के नेताओं के सामने भारत की आपत्ति को स्पष्ट तौर पर रखा और उन्होंने भी अपने बयान के ज़रिए इस पर भारत का पक्ष रख दिया था.

उनका कहना था कि जो देश में सर्वमान्य है उस पर संसद में प्रस्ताव लाने का कोई अर्थ ही नहीं है.

उन्होंने दोहराया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा. लेकिन चीन के साथ सीमा विवाद पर चल रही बातचीत में तनाव लाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.

दरअसल विपक्ष इसे राष्ट्रीयता का मुद्दा बना कर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा था और इसमें समाजवादी पार्टी के सांसद उसके साथ थे.

वामदलों ने सरकार के साथ खड़े हो कर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा और कहा कि वो यह साबित करने की कोशिश ना करें कि वो अन्य दलों की अपेक्षा ज़्यादा देशभक्त हैं.

मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के सांसद मोहम्द सलीम ने कहा कि दरअसल कुछ लोग नहीं चाहते कि भारत और चीन के बीच संबंध सुधरें.

भारतीय जनता पार्टी आरोप लगाती रही है कि वामदल चीन के मामले पर नरम पड़ जाते हैं और देश की विदेश नीति पर अपनी शर्तें लाद रहे हैं.