गुरुवार, 23 नवंबर, 2006 को 06:05 GMT तक के समाचार
यूपीए गठबंधन की बैठक में केंद्र सरकार के घटक दलों ने तय किया है कि महिला आरक्षण विधेयक संसद के इसी शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा.
महिला आरक्षण विधेयक के बारे में पत्रकारों को जानकारी देते हुए सूचना और प्रसारण मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने कहा, "यूपीए के घटक दलों ने सर्वसम्मति से यह फ़ैसला लिया है कि सदन के इस शीतकालीन सत्र में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने से संबंधित विधेयक पेश किया जाएगा."
उन्होंने बताया कि इसके बाद इसे संसद की स्थाई समिति के पास चर्चा के लिए भेज दिया जाएगा. चर्चा के बाद जो सिफारिशें आएंगी, सरकार उसके मुताबिक फ़ैसला लेगी.
इस बैठक में केंद्र सरकार में शामिल राजनीतिक दलों के नेताओं के अलावा वामदलों ने भी हिस्सा लिया.
हालांकि केंद्र सरकार के घटक दलों के बीच भी इस विधेयक को लेकर कुछ गतिरोध बना हुआ है पर प्राथमिक तौर पर इस विधेयक पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनी है.
सशक्तिकरण के लिए
इससे पूर्व बुधवार को ही पंचायती राज की समीक्षा के लिए हुई बैठक में बोलते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि वो सदन के इस सत्र में महिला आरक्षण बिल को लेकर आशान्वित हैं.
उन्होंने कहा कि भारत में जितने पदों पर महिलाएँ लोगों के बीच से चुनकर आ रही हैं वो संख्या दुनिया में बाकी जगहों पर चुनकर आ रही महिलाओं की कुल तादाद के बराबर है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उदाहरण संसद को भी इन्हें बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करेगी.
मनमोहन सिंह ने इस बात पर ज़ोर देते हुए कहा कि पंचायती व्यवस्था में पिछड़े वर्ग और महिलाओं को आरक्षण से ये वर्ग राजनीतिक और सामाजिक रूप से मज़बूत हुए हैं.
ग़ौरतलब है कि देश के कई राजनीतिक दलों के बीच महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने को लेकर कई तरह के गतिरोध और मतभेद हैं.
पिछली सरकारों की ओर से इससे पहले भी इस विधेयक को पारित कराने के प्रयास किए गए पर इसे लागू नहीं कराया जा सका.