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गुरुवार, 23 नवंबर, 2006 को 14:45 GMT तक के समाचार

हू पाकिस्तान की सामरिक यात्रा पर

चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ ने तीन दिन की भारत यात्रा के दौरान व्यापार और राजनीतिक मुद्दों पर व्यापक बातचीत के बाद गुरूवार को पाकिस्तान की यात्रा शुरू की है.

चीनी नेता की इस यात्रा को सामरिक रूप से काफ़ी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने कहा है कि राष्ट्रपति हू जिंताओ की पाकिस्तान यात्रा के दौरान कुछ अभूतपूर्व समझौते होने की संभावना है लेकिन इस बारे में ज़्यादा विवरण नहीं दिया गया है.

संवाददाताओं का कहना है कि इस तरह की व्यापक अटकलें लगाई जा रही हैं कि इन समझौतों में पाकिस्तान के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को चीनी सहायता का दायरा बढ़ाने की व्यवस्था भी शामिल हो सकती है.

यह उसी तरह की सहायता होगी जैसी कि भारत और अमरीका के बीच परमाणु सहयोग करने पर सहमति हुई और उसे कांग्रेस की मंज़ूरी का इंतज़ार किया जा रहा है.

संवाददाताओं का कहना है कि भारत हमेशा से ही पाकिस्तान के लिए चीन की नज़दीकी से चिंतित रहा है, ख़ासतौर से चीन के साथ पाकिस्तान के सैनिक समझौतों और संधियों को लेकर. ग़ौरतलब है कि भारत और चीन के बीच काफ़ी लंबे समय से तनाव रहा है.

लेकिन चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ ने कहा बुधवार को दिल्ली में कहा था कि उनका देश भारत के साथ संबंधों में किसी तरह के स्वार्थी हित नहीं देख रहा है और चीन भारत और पाकिस्तान के बीच शांति क़ायम होने में मदद भी कर सकता है.

चीनी राष्ट्रपति जिंताओ ने यह भी कहा कि एक शांतिपूर्ण और समृद्ध दक्षिण एशिया क्षेत्र पूरे विश्व के लिए हितकारी है.

भारत और चीन

चीन और भारत दोनों ही उभरी ताक़तवाले देश हैं लेकिन पश्चिमी देशों के साथ व्यापार संबंधों के नज़रिए से देखा जाए तो चीन ज़्यादा ताक़तवर बैठता है.

इसके अलावा चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक स्थाई सदस्य दैश है और उसके आर्थिक विकास की दर भी काफ़ी तेज़ है.

चीन ने भारत के आसपास के अनेक देशों में करोड़ों डॉलर का निवेश किया हुआ है और यह निवेश बर्मा, श्रीलंका और नेपाल में ज़्यादातर बंदरगाहों और सड़कों में हुआ है.

हू जिंताओ पिछले दस साल में ऐसे पहले चीनी राष्ट्राध्यक्ष हैं जो भारत और पाकिस्तान का दौरा कर रहे हैं.