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नेपाल में जश्न, आज सार्वजनिक छुट्टी

नेपाल में सरकार और माओवादी विद्रोहियों के बीच शांति समझौते के बाद वहाँ जश्न का माहौल है.

जगह-जगह लोग इकट्ठा होकर जश्न मना रहे हैं. जब नेपाली प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला और माओवादी नेता प्रचंड ने मंगलवार देर रात समझौते पर हस्ताक्षर किए तो लोगों ने सार्वजनिक स्थानों पर मोमबत्तियाँ जलाईं.

इस साल अप्रैल के बाद से चल रही शांति प्रक्रिया की सफलता की खुशी में सरकार ने बुधवार को सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की है.

स्थानीय मीडिया ने भी इस समझौता का स्वागत किया है. ये समझौता नेपाली अख़बारों की सुर्ख़ियों और संपादकीयों में छाया रहा.

काठमांडू पोस्ट ने लिखा है कि इस समझौते से एक 'नई सुबह' का आगाज़ हुआ है जिसमें शांति, प्रगति और समृद्धि होगी.

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

नेपाल के पड़ोसी देश भारत ने भी समझौता का स्वागत किया है.

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत उम्मीद करता है कि समझौते के बाद हिंसा ख़त्म हो जाएगी.

वहीं काठमांडू में अमरीकी दूतावास के बयान में कहा गया है कि समझौते के चलते नेपाल शांति और लोकतंत्र के पथ पर बढ़ सकेगा.

संयुक्त राष्ट्र ने इस समझौते का स्वागत किया है और इसे शांति प्रकिया में 'एक और क़दम बताया' है.

मंगलवार को हुए इस समझौते से नेपाल में दस साल से चला आ रहा माओवादी आंदोलन ख़त्म हो गया. इस दौरान करीब तेरह हज़ार लोगों की जान गई.

माओवादी नेता प्रचंड ने समझौते के बारे मे कहा, "ये 238 साल पुरानी सामंतशाही को ख़त्म करेगा. हमारी पार्टी ज़िम्मेदारी और नए जोश से काम करेगी."

वहीं नेपाली प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला का कहना था, "इस समझौते के बाद हत्या, हिंसा और आंतक की राजनीति ख़त्म हो गई है और सहयोग की राजनीति शुरू हो गई है."

समझौते के तहत विद्रोही अंतरिम सरकार में शामिल होंगे और उनके हथियार संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में रहेंगे.