बुधवार, 22 नवंबर, 2006 को 08:45 GMT तक के समाचार
भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल में अधिकारियों ने कहा है कि कोलकाता में एक चमड़े की फ़ैक्ट्री में लगी आग से कम से कम नौ लोग मारे गए हैं.
पश्चिम बंगाल पुलिस के प्रवक्ता राज कनोजिया ने बीबीसी को बताया कि कम सम कम नौ लोग ज़िंदा जल गए. उन्होंने बताया कि फ़ैक्ट्री के दरवाज़े बंद थे और कर्मचारी जल्दी से बाहर नहीं आ पाए.
आग पूर्वी कोलकाता की तोपसिया गली की फ़ैक्ट्री में देर रात लगी. आग बुझाने में पाँच फ़ायर इंजनों का इस्तेमाल किया गया और इसमें कई घंटों का वक़्त लगा.
राज्य के अग्निशमन सेवा के प्रमुख गोपाल भट्टाचार्य ने कहा है कि आग के कारणों का बारे में पक्के तौर पर पता नहीं चल पाया है लेकिन फ़ैक्ट्री में कई ज्वलनशील पदार्थ रखे हुए थे.
उन्होंने बताया कि कि कम से कम 18 लोगों गंभीर रूप से जल गए हैं.
डॉक्टरों ने मुताबिक हताहतों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो सकती है क्योंकि कई लोग 60 फ़ीसदी तक जल गए हैं.
'अवैध फ़ैक्ट्री'
अग्निशमन सेवा के प्रमुख गोपाल भट्टाचार्य ने कहा है कि चमड़े की इस फ़ैक्ट्री में आग बुझाने का कोई उपकरण या सुविधा नहीं थी.
उनका कहना था कि ये एक अवैध फ़ैक्ट्री थी और अग्निशमन दल के कर्मचारियों को ताले तोड़ कर एक तंग रास्ते से अंदर आना पड़ा जिससे समय ज़ाया हुआ.
लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि अग्निशमन दल को अलर्ट किए जाने के बाद भी उन्होंने क़दम उठाने में देरी की.
स्थानीय नागरिक दिलीप मिस्त्री ने कहा, "अग्निशमन दल बुलाए जाने के एक घंटे के बाद आया."
पिछले कुछ सालों में कोलकाता में आग लगने की घटना में हताहतों की ये सबसे बड़ी संख्या है.
कोलकाता के मेयर बिकाश रंजन भट्टाचार्य ने फ़ैक्ट्री का दौरा करने के बाद कहा कि परिसर का ज़्यादातर हिस्सा अवैध था और फ़ैक्ट्री मालिकों के ख़िलाफ़ क़दम उठाए जाएँगे.
लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमों के दायरे से बाहर जाकर कई इमारतें बनाई जाती हैं लेकिन सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देकर लोग बच निकलते हैं.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि पुराने कोलकाता की इमारतों और झुग्गियों में अकसर आग लगने की घटनाएँ होती रहती हैं और फ़ायर अलार्म प्रणाली और उपकरण न होने के चलते काफ़ी नुकसान होता है.